SEBI के नियमों के तहत 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) का दर्जा न मिलने से MTAR Technologies को बड़ा फायदा हुआ है। कंपनी अब FY2024-25 और FY2025-26 के लिए डेट सिक्योरिटीज (Debt Securities) के ज़रिए फंड जुटाने के ज़रूरी नियमों से बच गई है।
SEBI का मकसद कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देना है। इन नियमों के तहत, 'लार्ज कॉर्पोरेट्स' को तीन साल में कम से कम 25% की योग्य बोरिंग (Borrowing) डेट सिक्योरिटीज से करनी होती है। MTAR Technologies के LC के दायरे से बाहर होने का मतलब है कि उन्हें डेट जारी करने से जुड़े इन अतिरिक्त अनुपालन (Compliance) और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियों से राहत मिल गई है। इससे उनकी फाइनेंसिंग स्ट्रैटेजी में काफी लचीलापन (Flexibility) आएगा।
SEBI के मुताबिक, 'लार्ज कॉर्पोरेट' वो लिस्टेड कंपनी होती है जिसकी आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बोरिंग ₹1000 करोड़ या उससे ज़्यादा हो और क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे बेहतर हो। मार्च 2025 तक, MTAR Technologies का कुल लॉन्ग-टर्म डेट सिर्फ ₹177 करोड़ था, जो LC बनने के लिए ज़रूरी ₹1000 करोड़ के बेंचमार्क से काफी कम है।
कंपनी ने हाल ही में अपने फाइनेंशियल ईयर 2025 के नतीजे घोषित किए हैं। MTAR Technologies ने ₹676 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जबकि नेट प्रॉफिट ₹52.9 करोड़ रहा।
इस स्टेटस की वजह से MTAR Technologies को डेट फंडरेज़िंग और डिस्क्लोजर (Disclosure) के लिए कम अनुपालन बोझ उठाना पड़ेगा। वे डेट मार्केट में न्यूनतम कोटा को पूरा करने के दबाव के बिना, अपने विकास के लिए फाइनेंसिंग में और अधिक लचीलेपन का आनंद ले पाएंगे।
हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यदि कंपनी भविष्य में बड़े डेट-फंडेड ग्रोथ प्लान बनाती है, तो उसे LC थ्रेशोल्ड (Threshold) पूरा करने की आवश्यकता हो सकती है।
MTAR Technologies जिस सेक्टर में काम करती है, उसमें कई बड़े खिलाडी मौजूद हैं। Hindustan Aeronautics Ltd (HAL), Bharat Electronics Ltd (BEL), और Larsen & Toubro (L&T) Defence जैसी कंपनियां काफी बड़ी हैं। उदाहरण के लिए, HAL का FY2025-26 का रेवेन्यू ₹32,250 करोड़ से ज़्यादा था। ये बड़ी कंपनियां अपने स्केल और बोरिंग क्षमता के कारण लगभग निश्चित रूप से 'लार्ज कॉर्पोरेट' मानी जाती हैं।
