मुनाफे में भारी गिरावट और ऑडिटर की चिंताएं
MOIL Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹381.64 करोड़ से 30% गिरकर ₹267.48 करोड़ पर पहुँच गया है। इस दौरान कंपनी की कुल आय ₹1,472.84 करोड़ रही, जो पिछले साल से कम है। वहीं, चौथे क्वार्टर (Q4 FY26) में कंपनी ने ₹92.61 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
रेवेन्यू और इन्वेंटरी पर ऑडिटर का सवाल
नतीजों के साथ आए ऑडिटर की रिपोर्ट में MOIL की रेवेन्यू रिकॉग्निशन (राजस्व पहचान) प्रक्रिया और इन्वेंटरी वैल्यूएशन (मालसूची मूल्यांकन) पर चिंताएं जताई गई हैं। ऑडिटर ने रेवेन्यू रिपोर्टिंग के लिए IND AS 115 स्टैंडर्ड का पालन और निम्न-श्रेणी की इन्वेंटरी के मूल्यांकन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इससे संभावित कंप्लायंस और बिक्री योग्यता (saleability) के मुद्दे खड़े हो सकते हैं।
बोर्ड में जरूरी डायरेक्टर्स की कमी
इसके अलावा, MOIL को SEBI के लिस्टिंग नियमों को लेकर भी एक कंप्लायंस गैप का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के बोर्ड में फिलहाल आवश्यक संख्या में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स नहीं हैं। इस गवर्नेंस कमी को दूर करना रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशक अब इस पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी इन मुद्दों को कैसे हल करती है। खास तौर पर, SEBI के नियमों के अनुसार आवश्यक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति, रेवेन्यू रिकॉग्निशन और इन्वेंटरी वैल्यूएशन पर ऑडिटर की चिंताओं को दूर करने की कंपनी की योजना पर फोकस रहेगा।
