इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में अब तक क्या हुआ?
MEP Infrastructure Developers Ltd. ने 22वीं कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की मीटिंग के बाद यह जानकारी दी है। यह मीटिंग 9 अप्रैल 2026 को हुई थी। कंपनी 28 मार्च 2024 से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) मुंबई के आदेश के तहत कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है।
यह CIRP, बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) द्वारा ₹127.86 करोड़ के डिफॉल्ट (Default) के दावे के बाद शुरू हुई थी। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) 2016 के सेक्शन 14 के तहत, कंपनी के इस प्रोसेस में जाने के बाद से ही एक मॉरेटोरियम (Moratorium) लागू है।
क्रेडिटर्स का रोल और पिछली मुश्किलें
कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) CIRP प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है। ये क्रेडिटर कंपनी के भविष्य को लेकर फैसले लेते हैं और पूरे रेज़ोल्यूशन प्रोसेस पर नज़र रखते हैं। नियमित मीटिंग्स यह सुनिश्चित करती हैं कि सभी लेनदारों को जानकारी मिलती रहे और वे प्रक्रिया में शामिल रहें।
MEP Infrastructure Developers पहले भी रेगुलेटरी जांचों के दायरे में रही है। कंपनी पर स्टॉक एक्सचेंजों NSE और BSE ने देरी से फाइलिंग के लिए पेनल्टी (Penalty) लगाई थी। वहीं, SEBI ने भी डिस्क्लोज़र (Disclosure) नियमों के अनुपालन में देरी को लेकर शो-कॉज नोटिस (Show-cause notice) जारी किए थे। इन पुरानी गवर्नेंस (Governance) से जुड़ी दिक्कतों का असर मौजूदा रेज़ोल्यूशन प्लान पर पड़ सकता है।
भविष्य की राह और जोखिम
CIRP के तहत, शेयरधारकों (Shareholders) के हितों का प्रतिनिधित्व प्रक्रिया के माध्यम से होता है, जबकि CoC अहम फैसले लेती है। इसका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा रेज़ोल्यूशन प्लान बनाना है जो कंपनी के कर्जों को संबोधित करे। नियुक्त रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) और CoC की देखरेख में कंपनी के कामकाज जारी रहते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा जोखिम CIRP के अंतिम नतीजे को लेकर बनी अनिश्चितता ही है।
MEP Infrastructure Developers, रोड इंफ्रास्ट्रक्चर (Road Infrastructure) और कंस्ट्रक्शन (Construction) सेक्टर में काम करती है। इस सेक्टर की अन्य बड़ी कंपनियों में Larsen & Toubro Ltd., IRB Infrastructure Developers Ltd., Ashoka Buildcon Ltd., और Reliance Infrastructure Ltd. शामिल हैं, जो आमतौर पर इंसॉल्वेंसी की जटिलताओं के बिना बड़े EPC और टोल रोड प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन करती हैं।
निवेशक अब NCLT से रेज़ोल्यूशन प्लान और कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के फैसलों को लेकर भविष्य के अपडेट्स पर नज़र रखेंगे।