रिवाइवल की राह पर MBL Infra: ₹300 करोड़ जुटाने को बोर्ड की मंजूरी
MBL Infrastructure अपनी रिवाइवल (Revival) की राह पर है और इसी कड़ी में कंपनी ने अपने वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने ₹300 करोड़ तक का फंड जुटाने के लिए सिक्योरिटीज जारी करने की मंजूरी दे दी है। यह पैसा कंपनी को प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने और अपने कर्ज़ (Debt) को कम करने में मदद करेगा, जो कि कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से बाहर आने के बाद कंपनी के लिए बेहद ज़रूरी है।
प्रमोटर हिस्सेदारी में बड़ा उछाल
इसी फंड जुटाने की प्रक्रिया के तहत, प्रमोटर ग्रुप की फर्म MLSMH LLP को 19 लाख इक्विटी शेयर्स अलॉट किए गए हैं। इस अलॉटमेंट के बाद, प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 75.24% पर पहुंच गई है। कंपनी का पेड-अप कैपिटल (Paid-up Capital) भी ₹1,525.29 करोड़ से बढ़कर ₹1,544.29 करोड़ हो गया है।
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की पुनः नियुक्ति
एक अन्य अहम फैसले में, बोर्ड ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Independent Director) श्री राम दयाल मोदी की पांच साल के लिए पुनः नियुक्ति का समर्थन किया है। हालांकि, इस नियुक्ति के लिए शेयरधारकों की मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिसके लिए पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) के ज़रिए वोटिंग कराई जाएगी।
आगे क्या?
यह कदम कंपनी के रेज़ोल्यूशन प्लान (Resolution Plan) का हिस्सा है, जिसमें प्रमोटर इक्विटी का निवेश शामिल रहा है। इस नए शेयर अलॉटमेंट से पहले, प्रमोटर होल्डिंग अप्रैल 2026 तक 74.01% थी।
इस फंड जुटाने से कंपनी की कैपिटल पोजीशन (Capital Position) मजबूत होगी और प्रमोटर ग्रुप का कंट्रोल भी बढ़ेगा। वहीं, श्री राम दयाल मोदी की वापसी से गवर्नेंस (Governance) में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, ₹300 करोड़ के फंड जुटाने में बाज़ार की स्थिति और शेयरधारकों की मंजूरी का रिस्क (Risk) रहेगा। साथ ही, प्रमोटर होल्डिंग का 75% से ऊपर जाना मालिकी का कंसंट्रेशन (Concentration) बढ़ाता है, जिस पर शेयरधारकों के हितों का ध्यान रखना होगा।
MBL Infrastructure इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में Larsen & Toubro, Hindustan Construction Co. Ltd, Simplex Infrastructures Ltd, और Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL) जैसी बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। आगे चलकर शेयरधारकों के वोटिंग नतीजों, फंड जुटाने की बारीकियों, नए ऑर्डर्स और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नज़र रहेगी।