क्यों बंद हुई ट्रेडिंग विंडो?
Likhami Consulting Limited ने यह घोषणा की है कि 1 अप्रैल, 2026 से कंपनी की ट्रेडिंग विंडो, जिसमें कंपनी के प्रमुख लोग शामिल होंगे, बंद कर दी जाएगी। यह कदम 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स की घोषणा से ठीक पहले उठाया गया है।
यह कार्रवाई SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत की गई है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को, जिसे कंपनी के अंदर की गोपनीय और बाजार-संवेदनशील जानकारी (price-sensitive information) तक पहुंच है, वह शेयर की खरीद-बिक्री न कर सके। इससे सभी निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष बाजार बना रहता है।
1982 में स्थापित Likhami Consulting, कंसल्टेंसी और फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट, फाइनेंशियल कंसल्टिंग और मर्जर व एक्विजिशन जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देती है। एक पब्लिकली लिस्टेड कंपनी होने के नाते, यह वित्तीय नतीजों की घोषणा से पहले नियामक आवश्यकताओं का पालन करने के लिए नियमित रूप से ट्रेडिंग विंडो बंद करती है।
ट्रेडिंग विंडो के बंद रहने की अवधि के दौरान, प्रमोटर्स (promoters), डायरेक्टर्स (directors), की मैनेजेरियल पर्सनल (key managerial personnel), कनेक्टेड पर्सन्स (connected persons), डेजिग्नेटेड एम्प्लॉईज (designated employees) और उनके करीबी रिश्तेदार Likhami Consulting के शेयर खरीद या बेच नहीं पाएंगे। यह प्रतिबंध नतीजों की आधिकारिक घोषणा के 48 घंटे बाद ही हटेगा।
यह भारतीय शेयर बाजार में एक आम प्रक्रिया है, जहाँ Tata Consultancy Services (TCS), Infosys और Wipro जैसी बड़ी IT और कंसल्टिंग फर्मों द्वारा भी इसी तरह की ट्रेडिंग विंडो क्लोजर की जाती हैं। यह SEBI द्वारा बाजार की अखंडता बनाए रखने के लिए अनिवार्य एक मानक अनुपालन प्रक्रिया है।
निवेशक अब बोर्ड मीटिंग की तारीख की औपचारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें Q4 FY26 और पूरे वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर विचार किया जाएगा। कंपनी इस तारीख की सूचना जल्द ही जारी करेगी, जिसके साथ ही ट्रेडिंग विंडो के खुलने का भी संकेत मिलेगा।
