Lakhotia Polyesters (India) Ltd. ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने पूरे साल में ₹15.84 करोड़ (या ₹1,584.11 लाख) का रेवेन्यू दर्ज किया, जिस पर ₹2.38 करोड़ (या ₹237.52 लाख) का मुनाफा कमाया। इस दौरान प्रति शेयर आय (EPS) ₹2.27 रही।
अगर चौथी तिमाही (Q4 FY26) की बात करें, तो कंपनी का रेवेन्यू ₹0.10 करोड़ (या ₹9.86 लाख) था और मुनाफा ₹0.13 करोड़ (या ₹12.94 लाख) रहा। इस तिमाही की ईपीएस (EPS) ₹0.13 थी।
यह तो हुए नंबर्स। लेकिन, इस रिपोर्ट में एक बड़ा सवाल भी उठा है। कंपनी के वैधानिक ऑडिटर्स (Statutory Auditors) ने स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर तो क्लीन ओपिनियन (Unmodified Opinion) दी है, यानी नतीजों में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं है और वे नियमों के मुताबिक हैं।
मगर, ऑडिट रिपोर्ट में कुछ ऐसी बातें भी कही गई हैं जो निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती हैं। ऑडिटर्स ने यह साफ किया है कि धोखाधड़ी या गलती से होने वाली महत्वपूर्ण गलतियों (potential material misstatements) की संभावना है, और ऐसी धोखाधड़ी को पकड़ना हमेशा आसान नहीं होता।
सबसे अहम बात यह है कि ऑडिटर्स ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) क्षमता पर एक बड़ी चेतावनी दी है। इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं, जिनके चलते कंपनी का सामान्य रूप से काम करना मुश्किल हो जाए। हालांकि, फिलहाल ऑडिटर्स को कोई ठोस 'मटेरियल अनिश्चितता' (material uncertainty) नहीं दिखी है, लेकिन यह ऐसा पहलू है जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी होगी।
बता दें कि 1980 में स्थापित Lakhotia Polyesters (India) Ltd. मेटालिक यार्न और पॉलिएस्टर फिल्म्स बनाती है, और इसका मुख्य फोकस इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाली लैquered मेटलाइज्ड पॉलिएस्टर फिल्म्स पर है।
यह कंपनी टेक्सटाइल और पॉलिएस्टर सेक्टर में Garware Technical Fibres, Vardhman Textiles, और Trident जैसी बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।
अब निवेशकों को आगे कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे के ट्रेंड्स पर खास ध्यान देना होगा। यह देखना अहम होगा कि कंपनी का मैनेजमेंट ऑडिटर्स द्वारा उठाई गई 'गोइंग कंसर्न' की चिंताओं को कैसे दूर करता है।
