क्यों ज़रूरी है KYC अपडेट?
कंपनी अपने रजिस्ट्रार एंड शेयर ट्रांसफर एजेंट, M/s Ankit Consultancy Pvt. Ltd. के ज़रिए शेयरधारकों से ज़रूरी जानकारी जैसे परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN), बैंक अकाउंट डिटेल्स और कॉन्टैक्ट इन्फॉर्मेशन मांग रही है। इस प्रक्रिया का मुख्य मकसद बाज़ार में पारदर्शिता लाना, धोखाधड़ी रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि शेयरधारकों को डिविडेंड (Dividend) जैसे भुगतान बिना किसी रुकावट के मिलते रहें।
फिजिकल शेयरधारकों के लिए क्या है एक्शन?
जिन निवेशकों के पास फिजिकल शेयर हैं, उनके लिए मांगी गई KYC डॉक्यूमेंट्स को समय पर जमा करना बहुत ज़रूरी है। ऐसा न करने पर उन्हें भुगतान प्राप्त करने, सर्विस रिक्वेस्ट (Service Request) प्रोसेस कराने या ट्रांज़ैक्शन (Transaction) करने में दिक्कत आ सकती है। वहीं, Kriti Nutrients Ltd को भी शेयरधारकों के रिकॉर्ड अपडेट होने से एडमिनिस्ट्रेशन और कंप्लायंस (Compliance) में आसानी होगी।
SEBI का बड़ा कदम
SEBI (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) लगातार सिक्योरिटीज के डिमेटेरियलाइजेशन (Dematerialization) को बढ़ावा दे रहा है। 6 फरवरी, 2026 के मास्टर सर्कुलर के ज़रिए, SEBI ने फिजिकल सिक्योरिटी होल्डर्स से भी अपडेटेड KYC डेटा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है, ताकि फिजिकल रिकॉर्ड्स को डिजिटल मानकों के बराबर लाया जा सके।
अन्य कंपनियों की राह पर Kriti Nutrients
यह कोई अकेला मामला नहीं है। कई अन्य बड़ी कंपनियां भी इस तरह की KYC ड्राइव चला रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Biocon Limited ने गैर-अनुपालक खातों के लिए डिविडेंड भुगतान रोकने की चेतावनी दी है। इसी तरह, Mid India Industries Limited और Cummins India Limited ने भी अधूरी डॉक्यूमेंटेशन के चलते सर्विस में रुकावट और प्रोसेसिंग में देरी की बात कही है।
