Kirloskar Ferrous Industries Ltd (KFIL) ने ₹1,000 करोड़ तक की राशि नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए जुटाने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगने का फैसला किया है। यह फंड लॉन्ग-टर्म डेट (Long-Term Debt) के रूप में कंपनी के खजाने में आएगा।
इसके अलावा, कंपनी ने अपनी एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन स्कीम (ESOP) के तहत 52,900 इक्विटी शेयर्स का आवंटन भी किया है। इस कदम से कंपनी का कुल पेड-अप कैपिटल (Paid-up Capital) बढ़कर ₹82.49 करोड़ हो गया है। कंपनी के अनुसार, यह कदम टैलेंट रिटेंशन (Talent Retention) की अपनी रणनीति का हिस्सा है।
NCDs से जुटाई जाने वाली यह ₹1,000 करोड़ की रकम संभवतः कंपनी की भविष्य की ग्रोथ योजनाओं (Growth Plans) को सहारा देने, मौजूदा डेट को रीफाइनेंस (Refinance) करने या वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। यह फैसला कंपनी की नवंबर 2023 में हुई ऐसी ही एक बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें शेयरधारकों की सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
अब कंपनी के सामने सबसे बड़ा कदम शेयरधारकों से इस NCD इश्यू के लिए औपचारिक मंजूरी हासिल करना है। इसमें अप्रूवल मिलने में देरी या बाज़ार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां आ सकती हैं, जो फंड जुटाने की शर्तों और समय-सीमा को प्रभावित कर सकती हैं।
Kirloskar Ferrous फाउंड्री और मेटालर्जिकल सेक्टर में अपनी पकड़ रखती है और डक्टाइल आयरन पाइप्स (Ductile Iron Pipes) बनाने में माहिर है। इसी सेक्टर में Electrosteel Castings Limited जैसी कंपनियां भी हैं, जिन्होंने FY23 में ₹2,464.59 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। वहीं, Shakti Pipes Limited का FY23 का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹1,316.24 करोड़ रहा।
FY23 के आंकड़ों के मुताबिक, KFIL का डेट/इक्विटी रेश्यो (Debt/Equity Ratio) 0.35 था, जबकि नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margin) 6.2% दर्ज किया गया था।
निवेशक अब शेयरधारकों की वोटिंग के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही, NCDs पर मिलने वाली ब्याज दर, मैच्योरिटी अवधि और फंड के इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी पर भी सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
