ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन में हुई डील
Kamal Prakash (HUF) ने 22 अप्रैल, 2026 को Nilachal Refractories Ltd. के 1.78% वोटिंग कैपिटल के बराबर 3,62,500 इक्विटी शेयर SFAL Speciality Alloys Ltd. को बेच दिए। इस ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन (off-market transaction) के बाद, Kamal Prakash (HUF) के पास अब Nilachal Refractories में कोई शेयर नहीं बचा है।
SFAL का बड़ा दांव: डीलिस्टिंग का रास्ता साफ?
यह डील SFAL Speciality Alloys Ltd. की उस बड़ी मुहिम का हिस्सा है जिसका मकसद Nilachal Refractories पर पूरा कंट्रोल हासिल कर उसे स्टॉक मार्केट से डीलिस्ट करना है। SFAL ने पहले भी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर (open offer) निकाला था, और इस नई खरीदारी से कंपनी की अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिशें साफ दिख रही हैं।
कंपनी और इंडस्ट्री पर एक नज़र
Nilachal Refractories, जो 1977 में स्थापित हुई थी, स्टील, सीमेंट और पेट्रोकेमिकल्स जैसे सेक्टर्स के लिए रिफ्रैक्टरी मटीरियल बनाती है। वहीं, SFAL Speciality Alloys मार्च 2023 में बनी कंपनी है जिसका फोकस Nilachal Refractories को डीलिस्ट करने के लिए एक्वायर करना है। भारतीय रिफ्रैक्टरी मार्केट में इन दिनों कंसॉलिडेशन (consolidation) का दौर चल रहा है, जैसा कि 2022 में RHI Magnesita द्वारा Dalmia Bharat Refractories का अधिग्रहण एक मिसाल है।
क्या बदल रहा है?
- Kamal Prakash (HUF) अब Nilachal Refractories का शेयरहोल्डर नहीं रहा।
- SFAL Speciality Alloys की Nilachal Refractories में हिस्सेदारी बढ़ी है।
- यह बिक्री SFAL के डीलिस्टिंग प्लान को आगे बढ़ाएगी।
कंपनी के सामने चुनौतियाँ
Nilachal Refractories की राह आसान नहीं है, क्योंकि कंपनी लगातार नेट लॉस (net loss) और घटती रेवेन्यू (revenue) से जूझ रही है। SFAL के डीलिस्टिंग प्लान की सफलता रेगुलेटरी अप्रूवल्स (regulatory approvals) और उसके ओपन ऑफर पर मार्केट की प्रतिक्रिया पर भी निर्भर करेगी।
वित्तीय आंकड़े
- 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई तिमाही में Nilachal Refractories का नेट लॉस ₹0.36 करोड़ रहा (स्टैंडअलोन)।
- 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए पूरे फाइनेंशियल ईयर में कंपनी की सेल्स ₹1.58 करोड़ थी (स्टैंडअलोन)।
आगे क्या?
निवेशकों की नज़र अब SFAL Speciality Alloys के पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर के नतीजों और रेगुलेटरी अप्रूवल्स पर रहेगी।
