दमदार नतीजे, न्यूक्लियर ऑर्डर्स ने दिखाई दम
KSB Limited ने FY2025 के लिए अपने वित्तीय नतीजों का ऐलान किया है, जिसमें कंपनी का रेवेन्यू ₹26,957 मिलियन (यानी करीब ₹2696 करोड़) रहा। वहीं, कंपनी का EBITDA ₹387 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि उनके पास कुल ₹25,848 मिलियन (यानी करीब ₹2585 करोड़) का ऑर्डर बुक है, जिसमें ₹1300 करोड़ अकेले न्यूक्लियर सेक्टर से आए हैं।
ग्रोथ के मुख्य इंजन: न्यूक्लियर, सोलर और वाटर
मार्च 2026 में हुई एक इन्वेस्टर मीट में KSB Limited ने अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर बात की। कंपनी ने न्यूक्लियर पावर सेक्टर, तेजी से बढ़ रहे सोलर बिजनेस और वाटर/वेस्टवाटर इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्रोथ का मुख्य जरिया बताया है। KSB भारत की अकेली कंपनी है जिसे NPCIL के 700 MW प्रेसराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर्स (PHWRs) के लिए प्राइमरी कूलेंट पंप सप्लाई करने का अप्रूवल मिला हुआ है। इसके अलावा, कंपनी न्यूक्लियर सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिए ISO 19443:2018 सर्टिफाइड भी है।
नए सेक्टर्स में विस्तार और बड़े ऑर्डर्स
न्यूक्लियर के अलावा, KSB अपने सोलर पंप बिजनेस का भी विस्तार कर रही है और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल कर रही है। कंपनी डेटा सेंटर्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते हुए सेक्टर्स में भी नए बिजनेस के मौके तलाश रही है। हाल ही में, KSB को एक यूरोपीय न्यूक्लियर प्लांट के लिए रिएक्टर कूलेंट पंप का €150 मिलियन (लगभग ₹1300 करोड़) से भी बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है। कंपनी का लक्ष्य 2026 तक अपने सोलर बिजनेस से ₹300 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है।
चुनौतियां और कॉम्पिटिशन
KSB के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। जियोपॉलिटिकल घटनाओं के कारण कमोडिटी की कीमतों में अचानक तेजी आ सकती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, प्रोजेक्ट्स में देरी या कॉन्ट्रैक्ट्स में प्राइस एडजस्टमेंट क्लॉज न होने से भी मुश्किलें आ सकती हैं। सप्लाई चेन, खासकर फाउंड्री में, भी एक चिंता का विषय है। न्यूक्लियर सेगमेंट में NPCIL द्वारा सप्लायर्स में विविधता लाने की कोशिशों के चलते कॉम्पिटिशन बढ़ने की उम्मीद है। KSB का मुकाबला Kirloskar Brothers Ltd., Shakti Pumps (India) Ltd. जैसी कंपनियों से है।
