रिकॉर्ड रेवेन्यू और मुनाफ़े का दम!
KPI Green Energy ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के कंसोलिडेटेड टोटल रेवेन्यू में 56.20% की गज़ब की बढ़ोतरी हुई और यह ₹2,741.52 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट भी 56.55% बढ़कर ₹509.24 करोड़ रहा। यह लगातार आठवां क्वार्टर है जब कंपनी ने रेवेन्यू के नए रिकॉर्ड बनाए हैं।
FY26 के चौथे क्वार्टर (Q4) की बात करें तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 40.22% बढ़कर ₹810.20 करोड़ रहा, जबकि प्रॉफिट ₹155.48 करोड़ दर्ज किया गया। ऑडिटर ने कंपनी के नतीजों पर अपनी Unmodified Opinion दी है और FY26 के लिए ₹0.40 प्रति शेयर का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है।
विस्तार के लिए बढ़ाया कर्ज़?
यह शानदार ग्रोथ कंपनी के सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स में ज़ोरदार कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का नतीजा है। कंपनी बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही है, जिसके लिए उसने बड़े पैमाने पर डेट (Debt) का सहारा लिया है। कंपनी की टिपिकल प्रोजेक्ट स्ट्रक्चर में 75:25 का डेट-टू-इक्विटी रेशियो फॉलो होता है। हाल ही में, केनरा बैंक (Canara Bank) से विंड प्रोजेक्ट के लिए ₹979 करोड़ और एसबीआई (SBI) से सोलर व हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स के लिए ₹32 बिलियन का बड़ा डेट सेंक्शन मिलना, इस बात का संकेत है कि कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं को फंड करने के लिए बड़े कर्ज़ ले रही है।
कर्ज़ का बढ़ता बोझ
FY26 के अंत तक कंपनी के कंसोलिडेटेड बॉरोइंग्स (Consolidated Borrowings) में भारी उछाल देखा गया, जो पिछले साल के ₹1,125.48 करोड़ से लगभग चार गुना बढ़कर ₹4,531.95 करोड़ हो गया। इसके चलते कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो भी 0.46 से बढ़कर 1.49 हो गया है। यह बढ़ता हुआ डेट-टू-इक्विटी रेशियो मैनेजमेंट की आक्रामक विस्तार की रणनीति को दिखाता है, जो काफी हद तक डेट फाइनेंसिंग पर निर्भर है। हालांकि, ऑडिटर की Unmodified Opinion से फाइनेंशियल रिपोर्टिंग की क्वालिटी पर भरोसा बना हुआ है।
मुख्य आंकड़े:
- कंसोलिडेटेड बॉरोइंग्स (31 मार्च, 2026): ₹4,531.95 करोड़
- कंसोलिडेटेड बॉरोइंग्स (31 मार्च, 2025): ₹1,125.48 करोड़
- कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेशियो (31 मार्च, 2026): 1.49
- कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेशियो (31 मार्च, 2025): 0.46
आगे क्या?
निवेशक अब कंपनी की बढ़ते कर्ज़ को मैनेज करने की रणनीति और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर बारीक नज़र रखेंगे। साथ ही, सरकारी नीतियों, रिन्यूएबल एनर्जी टैरिफ और बढ़ती ब्याज दरों के बीच कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने की क्षमता भी अहम होगी।
