KOEL ने 30 मार्च, 2026 को Kirloskar Advanced Systems Private Limited (KASPL) के गठन की घोषणा की। इस नई सब्सिडियरी में KOEL ₹9 करोड़ का नकद निवेश करेगी और यह पूरी तरह से KOEL के नियंत्रण में रहेगी। KASPL का मुख्य काम डिफेंस (Defence) और रेलवे (Railway) सेक्टर्स के लिए इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट (industrial equipment) को डिजाइन करना, उन्हें विकसित करना, मैन्युफैक्चर करना और उनकी सर्विसिंग करना होगा।
इस रणनीतिक कदम से KOEL का बिजनेस भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों से सीधा जुड़ जाएगा। कंपनी का मानना है कि इन सेक्टर्स में रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) की अपार संभावनाएं हैं और इससे KOEL की इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग कैपेबिलिटी (industrial engineering capabilities) को भी नई उड़ान मिलेगी।
बता दें कि KOEL का डिफेंस सेक्टर से पुराना नाता रहा है। कंपनी पहले भी इंडियन नेवी (Indian Navy) के लिए पावर सॉल्यूशंस (power solutions) और मरीन डीजल इंजन (marine diesel engines) सप्लाई करती रही है। साथ ही, रेलवे सेक्टर में भी कंपनी ने RITES जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशी हैं, जो KASPL के गठन के पीछे की मंशा को स्पष्ट करता है।
हालांकि, डिफेंस जैसे संवेदनशील सेक्टर में परिचालन के लिए KASPL को जरूरी लाइसेंस (licenses) और रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) हासिल करने होंगे।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि डिफेंस और रेलवे जैसे बड़े और कॉम्पिटिटिव (competitive) सेक्टर्स में Bharat Forge, L&T Defence, BEML, और BEL जैसे कई दिग्गज प्लेयर्स (players) पहले से अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। ऐसे में, KASPL की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपनी पेरेंट कंपनी KOEL की मजबूत इंजीनियरिंग विशेषज्ञता (engineering expertise) का कितना प्रभावी ढंग से लाभ उठा पाती है और इन स्थापित खिलाड़ियों के बीच कैसे अपनी जगह बनाती है।