निवेश का पूरा विवरण
कंपनी ने बताया कि उसने Oyster Green Hybrid One Private Limited, जो कि एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) है, में अपनी प्रतिबद्धता (committed investment) को अंतिम रूप दे दिया है। हाल ही में ₹23.41 करोड़ का अतिरिक्त निवेश करके, कंपनी की कुल प्रतिबद्धता ₹132 करोड़ तक पहुँच गई है। इसके साथ ही SPV में कंपनी की इक्विटी हिस्सेदारी (equity stake) में 4.60% का इजाफा हुआ है।
यह SPV 282 MW का एक हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट हर साल लगभग 700 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा, जो Jindal Stainless की पावर ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर पाएगा। इस प्रोजेक्ट से हर साल करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन (carbon emissions) में कमी आने का अनुमान है।
SPV को 25 अगस्त, 2023 को शामिल किया गया था और प्रोजेक्ट के 3 अप्रैल, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
स्ट्रैटेजिक महत्व
यह निवेश Jindal Stainless के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह उसके पावर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस के लिए लगातार और ग्रीन एनर्जी की ज़रूरत को पूरा करेगा। रिन्यूएबल सोर्स से कैप्टिव पावर (captive power) हासिल करने से कंपनी ग्रिड पावर पर निर्भरता कम कर सकेगी और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भी बच सकेगी। यह कंपनी के 2050 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Jindal Stainless पहले से ही अपने ग्रीन एनर्जी फुटप्रिंट (footprint) को बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में ही कंपनी ने 26 MW का एक सोलर पावर प्लांट चालू किया था। कंपनी की लॉन्ग-टर्म प्लानिंग के तहत 2030 तक अपनी कुल बिजली खपत का लगभग 40% रिन्यूएबल सोर्स से पूरा करने का लक्ष्य है।
पीयर कंपैरिजन (Peer Comparison)
भारतीय स्टील इंडस्ट्री की दूसरी बड़ी कंपनियाँ भी रिन्यूएबल एनर्जी को प्राथमिकता दे रही हैं। Tata Steel ने सोलर पावर के लिए पावर परचेज़ एग्रीमेंट (Power Purchase Agreements) साइन किए हैं, वहीं JSW Steel भी कैप्टिव कंजम्पशन के लिए सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही है।