₹720 करोड़ का निवेश, 24 महीने में होगा तैयार
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस नए 1.50 मिलियन टन प्रति वर्ष (MnTPA) क्षमता वाले पेलेट प्लांट की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ के रायपुर में कंपनी के इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट में लगेगा और इसमें कुल ₹720 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा।
इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए ₹540 करोड़ का टर्म डेट (Term Debt) यानी लोन लिया जाएगा, जबकि बाकी ₹180 करोड़ इक्विटी (Equity) और कंपनी के इंटरनल फंड (Internal Accruals) से जुटाए जाएंगे। प्लांट का निर्माण कार्य करीब 24 महीने यानी 2 साल में पूरा होने की उम्मीद है।
कैप्टिव माइंस के आयरन ओर का होगा बेहतर इस्तेमाल
इस स्ट्रेटेजिक निवेश का मुख्य उद्देश्य Jayaswal Neco की अपनी कैप्टिव माइंस से निकलने वाले आयरन ओर (Iron Ore) का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना है। यह नया प्लांट माइनिंग के दौरान निकलने वाले आयरन ओर फाइंस (Fines) को कीमती पेलेट्स (Pellets) में बदलेगा। इस कदम से कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) मजबूत होगी, जिससे स्टील बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल के लिए बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होगी और लागत (Cost Efficiency) भी सुधरेगी।
1.50 MnTPA की अतिरिक्त क्षमता से कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटी में बड़ा उछाल आएगा। आयरन ओर पेलेट्स एक मार्केटेबल कमोडिटी (Marketable Commodity) हैं, जो कमाई के नए रास्ते खोल सकती हैं या मौजूदा बिक्री पर मार्जिन बढ़ा सकती हैं।
प्रोजेक्ट की राह में है ये एक बड़ी बाधा
इस प्रोजेक्ट की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने मौजूदा लेनदारों (Lenders) से जरूरी अप्रूवल हासिल कर पाती है या नहीं। ₹720 करोड़ के इस टोटल इन्वेस्टमेंट के लिए टाइमली फाइनेंशियल क्लोजर (Financial Closure) एक अहम पड़ाव साबित होगा।
Jayaswal Neco का यह पेलेटाइजेशन (Pelletization) पर फोकस इंडस्ट्री के बड़े ट्रेंड के साथ मेल खाता है। JSW Steel और Jindal Steel & Power Ltd (JSPL) जैसी बड़ी कंपनियां भी इसी तरह की सुविधाओं में निवेश कर रही हैं, ताकि रॉ मटेरियल एफिशिएंसी (Raw Material Efficiency) बढ़ा सकें और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस (Cost Competitiveness) में सुधार कर सकें।
