रेवेन्यू में उछाल, पर घाटे ने बढ़ाई सिरदर्दी
JITF Infralogistics ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड टोटल इनकम 23.60% बढ़कर ₹2,854 करोड़ रही, जिसका मुख्य श्रेय वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट को जाता है। लेकिन, इस ग्रोथ के बावजूद कंपनी मुनाफे में नहीं आ सकी। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए कंपनी ने ₹9.93 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है।
यह पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2025 के ₹144.77 करोड़ के मुनाफे से एक बड़ा उलटफेर है। पिछले साल का यह मुनाफा मुख्य रूप से 'डिस्कंटीन्यूड ऑपरेशंस' (बंद की गई व्यावसायिक गतिविधियों) से हुए बड़े लाभ के कारण था। वहीं, चौथी तिमाही (Q4 FY26) की बात करें तो कंपनी ने ₹913.43 करोड़ की टोटल इनकम पर ₹7.84 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है।
ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' चेतावनी
रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद घाटे में जाने की वजहों पर गौर करें तो, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कुल टैक्स एक्सपेंस ₹65.32 करोड़ रहा। लेकिन, सबसे गंभीर चिंता ऑडिटर की रिपोर्ट से उपजी है। ऑडिटर ने कंपनी की दो अहम सब्सिडियरी - JITF Water Infra (Naya Raipur) और JITF Urban Waste Management (Bathinda) - की 'गोइंग कंसर्न' यानी भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
एक सब्सिडियरी का तो महत्वपूर्ण कंसेशन एग्रीमेंट 2018 से रिन्यू ही नहीं हुआ है, जिससे उसकी परिचालन स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, कंपनी पर ₹3,359.53 करोड़ का भारी कंसोलिडेटेड नॉन-करंट बरोइंग (कर्ज) भी वित्तीय दबाव को बढ़ा रहा है। कंपनी को अपने भविष्य के विस्तार या पुनर्वित्त (restructuring) के लिए इस कर्ज का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होगी।
