ट्रेडिंग विंडो पर रोक, जानिए क्या है वजह?
Isgec Heavy Engineering Ltd. ने बाजार को सूचित किया है कि कंपनी 1 अप्रैल 2026 से अपनी ट्रेडिंग विंडो बंद कर रही है। यह पाबंदी कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 (जो 31 मार्च 2026 को खत्म हो रहा है) के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों के ऐलान के 48 घंटे बाद तक जारी रहेगी। यह फैसला भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के सख्त नियमों का पालन करते हुए लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंदरूनी व्यापार (insider trading) को रोकना और बाजार में निष्पक्षता बनाए रखना है।
PAN फ्रीज और अनुपालन (Compliance)
इस प्रक्रिया के तहत, कंपनी ने अपने 'डेजिग्नेटेड पर्सन' (designated persons) यानी खास अधिकारियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के स्थायी खाता नंबर (PAN) को भी फ्रीज कर दिया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नतीजे सार्वजनिक होने से पहले कोई भी अंदरूनी जानकारी का फायदा न उठा सके।
Isgec Heavy Engineering लिमिटेड SEBI के बाजार आचरण नियमों का लगातार पालन करती रही है। जुलाई 2025 में, कंपनी ने डेजिग्नेटेड पर्सन्स के लिए ट्रेडिंग आचार संहिता (Code of Conduct) में संशोधन भी किया था, जो SEBI (अंदरूनी व्यापार पर प्रतिबंध) नियम, 2015 के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
हाल की अन्य खबरें और सहकर्मियों का रुख
हाल की कुछ अन्य खबरों में, फरवरी 2025 में Nippon Life India Trustee Ltd. से एक महत्वपूर्ण अधिग्रहण की सूचना मिली थी। वहीं, दिसंबर 2025 में कंपनी को ₹40 लाख का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जुर्माना (ब्याज सहित) लगा था, जिसके खिलाफ Isgec Heavy Engineering अपील करने की योजना बना रही है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि ऐसी ट्रेडिंग विंडो बंद करने की प्रक्रिया भारत की अन्य बड़ी हेवी इंजीनियरिंग कंपनियां भी अपनाती हैं, जैसे Larsen & Toubro (L&T), Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL) और Thermax Ltd.
कंपनी का हालिया प्रदर्शन
कंपनी के हालिया प्रदर्शन की बात करें तो, फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में Isgec Heavy Engineering का रेवेन्यू ₹1,738.56 करोड़ रहा। वहीं, इस तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹84.44 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले तिमाही की तुलना में 50.04% अधिक है।
आगे क्या?
अब निवेशकों की नजरें बोर्ड मीटिंग की तारीख पर टिकी होंगी, जहाँ FY26 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। नतीजों की आधिकारिक घोषणा के साथ ही ट्रेडिंग विंडो फिर से खोली जाएगी। इसके बाद कंपनी की ओर से किसी भी कॉर्पोरेट एक्शन या रेगुलेटरी अपडेट पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।