FY26 में रेवेन्यू और प्रॉफिट में भारी गिरावट
Interarch Building Solutions Ltd ने अपने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू मार्च 2026 को खत्म हुए साल में ₹503.62 करोड़ रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के ₹1453.82 करोड़ के मुकाबले 65.4% कम है। इसी तरह, FY26 के लिए आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट घटकर ₹36.60 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹107.82 करोड़ था। नतीजतन, बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹68.51 से गिरकर ₹21.82 पर आ गया है।
शेयरधारकों को डिविडेंड और विस्तार की योजना
हालांकि, घरेलू बाजार में प्रदर्शन कमजोर रहने के बावजूद, कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन FY26 के लिए ₹12.50 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है। यह शेयरधारकों को सीधा रिटर्न देगा।
आगे की रणनीति पर नजर डालें तो, Interarch ने अपनी कमाई के स्रोतों को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। कंपनी ने कनाडा की ER Steel के साथ उत्तरी अमेरिकी बाजार में विस्तार के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते अंतरराष्ट्रीय ग्रोथ के अवसरों पर रणनीतिक फोकस को दर्शाते हैं। इसके अलावा, कंपनी ने ₹100 करोड़ तक के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) को फंड करना और ग्रोथ पहलों का समर्थन करना है।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
अन्य बातों पर गौर करें तो, अगस्त 2025 में Interarch Building Solutions Ltd पर इनकम टैक्स की तलाशी और सर्वे हुआ था। कंपनी का कहना है कि रिपोर्टिंग की तारीख तक, इससे जुड़े नतीजों में कोई बड़ा एडजस्टमेंट जरूरी नहीं था। नए लेबर कोड के लागू होने से ₹3.24 करोड़ का एक असाधारण आइटम आया है, जिसका अंतिम असर आगे के स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा। उत्तरी अमेरिका में होने वाला विस्तार ER Steel, कनाडा के साथ MoU के निश्चित समझौतों पर निर्भर करेगा।
Interarch स्ट्रक्चरल स्टील और प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग सेक्टर में काम करती है। इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों में Kalpataru Power Transmission Ltd और Skipper Ltd जैसी कंपनियां शामिल हैं।
आगे क्या देखना है?
निवेशक अब शेयरधारकों द्वारा अनुशंसित फाइनल डिविडेंड की मंजूरी का इंतजार करेंगे। ER Steel, कनाडा के साथ उत्तरी अमेरिकी विस्तार के लिए निश्चित समझौतों का अंतिम रूप देना और संभावित ज्वाइंट वेंचर के विवरण महत्वपूर्ण होंगे। नए लेबर कोड के लागू होने और उसके असर पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी। साथ ही, ₹100 करोड़ के QIP का पूंजी परियोजनाओं में इस्तेमाल कैसे होता है, यह देखना अहम होगा।
