प्रमोटर की बढ़ी हुई हिस्सेदारी का मतलब
यह खरीद 25 मार्च 2026 को हुई, जिसके बाद विमला इनानी के पास कंपनी के कुल 8,33,962 शेयर हो गए हैं। यह कंपनी की कुल वोटिंग कैपिटल का 4.47% है, जो पिछली बार से 0.05% की बढ़ोतरी दर्शाता है।
SEBI के 5% नियम का महत्व
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विमला इनानी अब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा निर्धारित 5% शेयरधारिता सीमा के काफी करीब पहुँच गई हैं। SEBI के नियम बताते हैं कि 5% या उससे अधिक हिस्सेदारी खरीदने पर रेगुलेटर को सूचित करना अनिवार्य होता है। इस स्तर के करीब पहुँचना अक्सर निवेशकों का ध्यान आकर्षित करता है, क्योंकि यह प्रमोटर के बढ़ते आत्मविश्वास या किसी नई रणनीतिक चाल का संकेत दे सकता है।
प्रमोटर्स की पुरानी खरीद
यह पहली बार नहीं है जब प्रमोटर्स ने Inani Marbles में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इससे पहले 13 मार्च 2024 को, विमला इनानी और सुरेश कुमार इनानी ने संयुक्त रूप से 9,15,452 शेयर खरीदे थे, जिसकी रिपोर्ट SEBI के Substantial Acquisition of Shares and Takeovers (SAST) रेगुलेशन के तहत की गई थी।
कंपनी का बिजनेस और भविष्य
1987 में स्थापित, Inani Marbles मार्बल, ग्रेनाइट और अन्य पत्थर उत्पादों का निर्माण और निर्यात करती है, और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी अच्छी पैठ है। बिल्डिंग मटेरियल सेक्टर में काम करने वाली यह कंपनी, प्रमोटर की बढ़ी हुई हिस्सेदारी के साथ, कंपनी के नियंत्रण को मजबूत करती है। अगर विमला इनानी 5% का आंकड़ा पार कर जाती हैं, तो SEBI के नियमों के तहत ओपन ऑफर (Open Offer) जैसी अनिवार्य खुलासे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
निवेशकों को भविष्य में प्रमोटर्स द्वारा और शेयर खरीदने, कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस, और खासकर विमला इनानी की हिस्सेदारी 5% की SEBI सीमा को पार करती है या नहीं, इस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
