'लार्ज कॉर्पोरेट' बनने के नियम क्या हैं?
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) फ्रेमवर्क तैयार किया है। पहले, ₹100 करोड़ या उससे अधिक के लॉन्ग-टर्म कर्ज वाली और 'AA' या उससे ऊपर की क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों को LC माना जाता था। हालांकि, 1 अप्रैल, 2024 से लागू हुए नए नियमों के अनुसार, अब ₹1000 करोड़ या उससे अधिक के लॉन्ग-टर्म कर्ज और मजबूत क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों को ही LC की श्रेणी में रखा जाएगा। IST Limited, जो ऑटो कंपोनेंट्स और SEZ डेवलपमेंट सेक्टर में काम करती है, इस नए और कड़े मापदंड पर खरी नहीं उतरती।
फंड-रेज़िंग और कंप्लायंस पर क्या होगा असर?
'लार्ज कॉर्पोरेट' स्टेटस वाली कंपनियों पर कुछ खास नियम लागू होते हैं, जैसे कि डेट मार्केट से एक निश्चित प्रतिशत फंड जुटाना और अतिरिक्त डिस्क्लोजर (disclosure) नियमों का पालन करना। IST Limited के 'लार्ज कॉर्पोरेट' न माने जाने का मतलब है कि कंपनी इन विशेष रेगुलेटरी ऑब्लिगेशन्स (regulatory obligations) से मुक्त रहेगी। इससे कंपनी के लिए कंप्लायंस (compliance) प्रक्रियाएं आसान होंगी और फंड जुटाने का तरीका भी सरल बना रहेगा।
और कंपनियों ने भी की ऐसी घोषणा
हाल के दिनों में IST Limited जैसी कई और लिस्टेड कंपनियों ने भी 'लार्ज कॉर्पोरेट' न होने की घोषणा की है। यह दिखाता है कि LC स्टेटस के लिए ज़रूरी बड़े फाइनेंशियल थ्रेशोल्ड (financial thresholds) को पूरा करना कई कंपनियों के लिए एक चुनौती है। Pecos Hotels & Pubs Ltd, Ducon Infratechnologies Limited, Pilani Investment and Industries Corporation Limited, और APAR Industries Limited जैसी कंपनियों ने भी अपने नॉन-LC स्टेटस की पुष्टि की है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों को IST Limited के फाइनेंशियल परफॉरमेंस (financial performance) और भविष्य की बरोइंग एक्टिविटीज़ (borrowing activities) पर नज़र रखनी चाहिए। अगर कंपनी के लॉन्ग-टर्म डेट में कोई बड़ा इजाफा होता है, तो वह भविष्य में 'लार्ज कॉर्पोरेट' क्राइटेरिया के करीब आ सकती है। साथ ही, SEBI द्वारा 'लार्ज कॉर्पोरेट' की परिभाषा में भविष्य में होने वाले बदलावों पर भी ध्यान देना ज़रूरी होगा।
