कब से शुरू होगा काम?
यह मंजूरी यूनिट के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पहले एयर क्वालिटी (Air Quality) के मुद्दों के कारण बंद कर दी गई थी। CAQM ने 28 मई, 2025 को यूनिट के लिए एक क्लोजर डायरेक्टिव (Closure Directive) जारी किया था। इसके बाद, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 30 मई, 2025 को कुछ शर्तों के साथ संचालन की अनुमति दी थी। अब CAQM के नवीनतम आदेश से इन सभी मुद्दों का पूर्ण समाधान हो गया है और यूनिट बिना किसी रोक-टोक के काम कर सकेगी।
कंपनी पर कितना असर?
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि उन्हें इस स्थिति से किसी बड़े फाइनेंशियल (Financial) या ऑपरेशनल (Operational) नुकसान की उम्मीद नहीं है। हालांकि, मुजफ्फरनगर फैसिलिटी कंपनी के कुल स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Standalone Revenue) का लगभग 3.5% योगदान करती है, लेकिन इसके संचालन की निरंतरता सप्लाई चेन (Supply Chain) को बनाए रखने और मौजूदा ऑर्डर्स (Orders) को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण थी। कंपनी का मानना है कि यह अस्थायी बंदी वित्तीय रूप से ज्यादा हानिकारक नहीं थी।
नियामक संस्थाएं और कंपनी
ISGEC Heavy Engineering Ltd. भारत भर में कई मैन्युफैक्चरिंग साइट्स के साथ एक विविध हेवी इंजीनियरिंग फर्म है। CAQM वह अथॉरिटी है जो दिल्ली-एनसीआर (NCR) और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए औद्योगिक बंदी का आदेश जारी करती है। NGT पर्यावरण से जुड़े विवादों को देखती है और नियमों का पालन सुनिश्चित करती है। ISGEC यूनिट के लिए बंदी का आदेश संभवतः इन निकायों द्वारा निगरानी की जा रही बढ़ती पर्यावरणीय अनुपालन आवश्यकताओं के कारण जारी किया गया था।
आगे क्या?
पूरी तरह से संचालन की अनुमति मिलने के बाद, मुजफ्फरनगर फैसिलिटी में प्रोडक्शन शेड्यूल (Production Schedule) के सामान्य होने की उम्मीद है। कंपनी ने एक अनिश्चितता भरे दौर को पार कर लिया है। CAQM और NGT द्वारा निर्धारित कड़े एयर क्वालिटी और पर्यावरणीय नियमों का निरंतर पालन करना महत्वपूर्ण होगा।