IRB Infra का 'गंगा एक्सप्रेस-वे' शुरू, 30 अप्रैल से ट्रायल रन, अब टोल से कमाई का रास्ता साफ

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IRB Infra का 'गंगा एक्सप्रेस-वे' शुरू, 30 अप्रैल से ट्रायल रन, अब टोल से कमाई का रास्ता साफ
Overview

IRB Infrastructure Trust के गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से बदायूं कॉरिडोर) पर **30 अप्रैल 2026** से ट्रायल रन ट्रैफिक ऑपरेशन शुरू होने जा रहे हैं। यह **129.7 किमी** लंबा, **6-लेन** वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही टोल वसूली शुरू करेगा, जिससे कंपनी की कमाई का रास्ता खुलेगा।

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IRB Infrastructure Trust ने घोषणा की है कि उनके गंगा एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट, जो मेरठ से बदायूं कॉरिडोर को जोड़ता है, पर 30 अप्रैल 2026 से ट्रायल रन ट्रैफिक ऑपरेशन शुरू होंगे।

यह 129.7 किलोमीटर लंबा, 6-लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे ₹6,538 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है और अब यह अपने अंतिम चरण में है।

इस प्रोजेक्ट के लगभग पूरा होने का संकेत है और यह IRB Infrastructure Trust के लिए रेवेन्यू जेनरेट करने की शुरुआत करेगा। यह उत्तर प्रदेश में IRB ग्रुप के करीब ₹25,000 करोड़ के हाईवे निवेश का हिस्सा है।

गंगा एक्सप्रेस-वे (ग्रुप 1) प्रोजेक्ट का प्रबंधन करने वाली स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) ट्रायल रन शुरू करेगी। इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को भारत के प्रधानमंत्री के हाथों हुआ था।

ट्रायल रन शुरू होने के तुरंत बाद टोल कलेक्शन शुरू होने की उम्मीद है, जो प्रोजेक्ट को रेवेन्यू-जेनरेटिंग फेज में ले जाएगा।

अब यह प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन से ऑपरेशनल फेज में शिफ्ट हो रहा है, और टोल कलेक्शन के जरिए कमाई शुरू हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में IRB की संपत्ति के विस्तार के साथ-साथ ऑपरेशनल एफिशिएंसी और टोल कलेक्शन पर भी फोकस बढ़ेगा।

हालांकि, कुछ संभावित चुनौतियों पर भी नजर रखनी होगी। 2017 में CMD और अन्य के खिलाफ जमीन हड़पने के आरोपों में CBI चार्जशीट जैसे ऐतिहासिक गवर्नेंस संबंधी चिंताएं रही हैं।

इसके अलावा, टोल कलेक्शन शुरू करने और उसे बढ़ाने से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क, अनुमानित और वास्तविक टोल रेवेन्यू में अंतर, और प्रोजेक्ट के डेट फाइनेंसिंग व ब्याज भुगतान को मैनेज करना भी महत्वपूर्ण पहलू हैं।

IRB Infra की सीधी टक्कर Larsen & Toubro, Ashoka Buildcon, और Kalpataru Projects International जैसे बड़े डेवलपर्स से है।

कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो 34.3x है, जो भारतीय कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के औसत 16.5x और पीयर एवरेज 26.4x से काफी ऊपर है।

कुछ पीयर्स जैसे Ahluwalia Contracts की तुलना में ऐतिहासिक सेल्स ग्रोथ और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) कम रहा है।

प्रोजेक्ट की मुख्य डिटेल्स में 129.7 किमी लंबाई, 6-लेन ग्रीनफील्ड डिजाइन और ₹6,538 करोड़ की लागत शामिल है।

फंडिंग में ₹2,659 करोड़ लेंडर्स से, ₹2,133 करोड़ IRB Infrastructure Trust से इक्विटी और ₹1,746 करोड़ वायबल गैप फंडिंग (VGF) शामिल है।

कॉन्सेशन पीरियड 30 साल का है, जिसे बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद है।

निवेशक और एनालिस्ट्स इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कॉरिडोर पर टोल कलेक्शन ठीक किस तारीख से शुरू होता है। IRB Infrastructure Trust से आने वाले शुरुआती मासिक और तिमाही रेवेन्यू आंकड़े महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के समग्र फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर इस नए रेवेन्यू स्ट्रीम का असर दिखेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.