शेयरधारकों ने बड़े सौदों को दी मंजूरी
IMP Powers Limited ने अपने शेयरधारकों से फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए ₹200 करोड़ के महत्वपूर्ण संबंधित-पक्षीय सौदों (related-party transactions) को मंजूरी दिला ली है। ये अहम सौदे GSEC Limited और Electrify Energy Private Limited के साथ किए जाने हैं। रिमोट ई-वोटिंग सहित पोस्टल बैलेट प्रक्रिया के ज़रिए यह फैसला लिया गया है।
वोटिंग के नतीजे और डीटेल्स
ई-वोटिंग की अवधि 28 मार्च, 2026 को समाप्त हुई। नतीजों के मुताबिक, डाले गए वोटों में से करीब 72.42% वोटों ने प्रस्तावों के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, यह समर्थन कंपनी के कुल बकाया शेयरों का एक छोटा सा हिस्सा था, जो कि डाले गए शेयरों का केवल 0.09% था।
सौदों का महत्व
ये स्वीकृत सौदे IMP Powers की विस्तार, विकास और बाज़ार में पैठ बढ़ाने की रणनीतिक योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर नए मैनेजमेंट के तहत। इनमें से GSEC Limited के साथ होने वाला सौदा IMP Powers के पिछले फाइनेंशियल ईयर के कंसोलिडेटेड टर्नओवर का 2140% है, जो इन सौदों के बड़े पैमाने और महत्व को दर्शाता है। वहीं, Electrify Energy के साथ प्रस्तावित सौदे पिछले फाइनेंशियल ईयर के कंसोलिडेटेड टर्नओवर का 14.98% है।
IMP Powers का हालिया इतिहास
1961 में स्थापित एक ट्रांसफार्मर निर्माता, IMP Powers Ltd ने हाल ही में एक बड़े पुनर्गठन (restructuring) को पूरा किया है। कंपनी पहले कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) और लिक्विडेशन से गुज़र चुकी है।
अगस्त 2024 में, मिस्टर राकेश आर. शाह से जुड़ी एक इकाई, Electrify Energy Private Limited ने नीलामी के ज़रिए कंपनी का अधिग्रहण किया था। सितंबर 2024 में एक नया बोर्ड और मैनेजमेंट नियुक्त किया गया था।
आगे की राह
शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद, IMP Powers अब FY 2026-27 के लिए प्रस्तावित संबंधित-पक्षीय सौदों पर आगे बढ़ सकती है। यह कंपनी को इन समझौतों के समर्थन से अपनी विस्तार और विकास की रणनीति पर काम करने में सक्षम बनाएगा। नए मैनेजमेंट के फैसलों को अब शेयरधारकों का समर्थन मिल गया है।
जुड़े जोखिम
संबंधित-पक्षीय सौदों में हमेशा हितों के टकराव (conflict of interest) और सौदों के बाज़ार की सामान्य शर्तों पर होने या न होने जैसे जोखिम जुड़े होते हैं। हालांकि कंपनी निष्पक्ष सौदों का आश्वासन देती है, लेकिन सावधानी बरतना ज़रूरी है। 0.09% जैसे बेहद कम शेयरधारक जुड़ाव (shareholder turnout) आगे चलकर गवर्नेंस के लिए चिंता का विषय बन सकता है।