IEX ने FY26 में तोड़े वॉल्यूम के रिकॉर्ड, पर↓रहीं कीमतें
इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) ने वित्त वर्ष 2026 (FY'26) के लिए अपने अब तक के सबसे मजबूत नतीजे पेश किए हैं। एक्सचेंज ने बिजली और रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट्स (RECs) दोनों में ट्रेडिंग वॉल्यूम के रिकॉर्ड तोड़े हैं। चौथी तिमाही (Q4 FY'26) और मार्च 2026 के नतीजों में भी मजबूत ग्रोथ दिखी है, भले ही बाजार की कीमतें (market prices) गिरी हों।
रिकॉर्ड बिजली और REC ट्रेडिंग
पूरे फाइनेंशियल ईयर FY'26 में, IEX का कुल बिजली ट्रेडिड वॉल्यूम रिकॉर्ड 141 बिलियन यूनिट (BU) रहा, जो पिछले साल की तुलना में 17% की भारी बढ़ोतरी है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट्स (RECs) की ट्रेडिंग भी एक नए सालाना रिकॉर्ड पर पहुंची, जिसमें 187.20 लाख सर्टिफिकेट का आदान-प्रदान हुआ, जो पिछले साल से 5% ज्यादा है। अकेले मार्च 2026 में REC ट्रेडिंग में शानदार तेजी देखी गई, जो साल-दर-साल 119.9% बढ़कर 28.94 लाख सर्टिफिकेट तक पहुंच गई।
गिरती कीमतें और मार्केट डायनामिक्स
ट्रेडिंग वॉल्यूम में इस जोरदार उछाल के बावजूद, डे-अहेड मार्केट (DAM) और रियल-टाइम मार्केट (RTM) में औसत मार्केट क्लियरिंग प्राइस (average market clearing prices) में गिरावट आई है। DAM में कीमतें 13.7% साल-दर-साल घटकर ₹3.86 प्रति यूनिट रहीं, जबकि RTM की कीमतें 16% गिरकर ₹3.59 प्रति यूनिट पर आ गईं। इस गिरावट का मुख्य कारण बाजार में बढ़ी हुई सप्लाई लिक्विडिटी (supply liquidity) है।
रेवेन्यू और मार्केट रोल पर असर
रिकॉर्ड वॉल्यूम IEX के भारत के बदलते ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते महत्व को दर्शाता है। RECs में मजबूत प्रदर्शन ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस में बढ़ती बाजार भागीदारी का संकेत है। हालांकि, कम कीमतें उपभोक्ताओं और प्रतिभागियों को फायदा पहुंचा सकती हैं, लेकिन प्रति यूनिट कम कीमत रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) के लिए एक चुनौती पेश कर सकती है। कंपनी के लिए आगे चलकर कुल ट्रेडिड वॉल्यूम का विस्तार करके वित्तीय गति बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
IEX भारत के एकमात्र डेजिग्नेटेड एनर्जी एक्सचेंज के रूप में काम करता है, जो प्राइस डिस्कवरी और मार्केट एफिशिएंसी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सचेंज ने G-TAM जैसे ग्रीन मार्केट सेगमेंट को भी रणनीतिक रूप से विकसित किया है।
नियामक और भविष्य की राह
यह भी ध्यान देने योग्य है कि कंपनी पहले नियामक जांच (regulatory scrutiny) के दायरे में रही है। SEBI ने कथित तौर पर प्रेफरेंशियल एक्सेस और संभावित मार्केट मैनिपुलेशन के लिए IEX की जांच की थी। एक्सचेंज को हाल ही में कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) से भी डोमिनेंट पोजीशन के दुरुपयोग के आरोप में पेनल्टी मिली थी, जो फिलहाल अपील में है।
आगे चलकर, निवेशक देखेंगे कि IEX प्रति यूनिट कीमतों में गिरावट के बीच वॉल्यूम विस्तार के माध्यम से रेवेन्यू ग्रोथ को कैसे मैनेज करता है। अप्रैल 2026 में REC ट्रेडिंग सेशन और भारत के ऊर्जा बाजार को प्रभावित करने वाले किसी भी नए मार्केट सेगमेंट या नियामक परिवर्तनों पर नजर रहेगी।
