NCLT का आदेश और अगली सुनवाई
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने Harish Textile Engineers Limited को एक पिटीशन पर देरी से जवाब देने के लिए ₹50,000 का कॉस्ट (cost) भरने का निर्देश दिया है। यह आदेश कमलेश कॉर्पोरेशन (Kamlesh Corporation) द्वारा दायर की गई उस पिटीशन से जुड़ा है जिसमें कंपनी पर बकाया ड्यूज़ (outstanding dues) का आरोप लगाया गया है। कंपनी को यह राशि आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर, यानी 19 मार्च, 2026 के बाद सात दिनों के अंदर, प्राइम मिनिस्टर नेशनल रिलीफ फंड में जमा करनी होगी। ट्रिब्यूनल ने इस मामले की अगली हियरिंग (hearing) के लिए 14 अप्रैल, 2026 की तारीख तय की है।
क्यों ज़रूरी है समय पर जवाब?
NCLT का यह फैसला कर्ज से जुड़े मामलों में प्रोसीजरल टाइमलाइन (procedural timelines) का पालन करने के महत्व को दर्शाता है। फिलहाल, ₹50,000 का तत्काल फाइनेंशियल इम्पैक्ट (financial impact) है, लेकिन कमलेश कॉर्पोरेशन के साथ चल रहा मूल विवाद अभी भी कानूनी जांच के दायरे में है।
कंपनी का इतिहास और वित्तीय स्थिति
Harish Textile Engineers, जिसकी स्थापना 2010 में हुई थी, टेक्सटाइल प्रोसेसिंग मशीनरी, अन्य इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स और पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर के निर्माण के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी का कानूनी विवादों का इतिहास रहा है, जिसमें पहले इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) जैसे मामले भी शामिल हैं। फरवरी 2021 में कंपनी के खिलाफ CIRP पिटीशन स्वीकार की गई थी। हाल ही में, मार्च 2026 में, डीप इंडस्ट्रीज (Deep Industries) ने कथित देरी से भुगतान के लिए ₹97.59 लाख का दावा पेश किया था। इससे पहले, नवंबर 2025 में, इलेक्ट्रोसिल 14 सिस्टम्स (Electrosil 14 Systems) ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) पर डिफॉल्ट और बाउंस हुए चेक (bounced checks) के आरोप में एक लीगल नोटिस जारी किया था। एक अलग मामला, जिसमें ₹11.72 लाख के बाउंस चेक का केस था, दिसंबर 2025 में सुलझ गया और बंद हो गया।
19 मार्च, 2026 तक, Harish Textile Engineers Ltd. का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market capitalization) लगभग ₹20.5 करोड़ था। फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए, कंपनी ने ₹133 करोड़ का रेवेन्यू (revenue) दर्ज किया था। आगे चलकर, कंपनी द्वारा ₹50,000 के कॉस्ट डिपॉजिट (cost deposit) की पुष्टि और कमलेश कॉर्पोरेशन पिटीशन से संबंधित 14 अप्रैल, 2026 की NCLT हियरिंग के किसी भी डेवलपमेंट (development) पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा, साथ ही क्रेडिटर क्लेम्स (creditor claims) के प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा।
