'EcoZen' का लो-कार्बन फायदा:
HZL का यह खास 'EcoZen' जिंक, प्रति टन जिंक पर 1 टन CO2 इक्विवेलेंट से भी कम का कॉर्बोन फुटप्रिंट रखता है। यह ग्लोबल इंडस्ट्री की औसत से लगभग 75% कम है। Tata Steel के साथ इस बढ़ी हुई साझेदारी का लक्ष्य स्टील सेक्टर में उत्सर्जन को कम करना और भारत की ग्रीन सप्लाई चेन को मज़बूत करना है। हिंदुस्तान जिंक भारत के प्राइमरी जिंक मार्केट का करीब 77% हिस्सा रखती है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर है।
ग्रीन स्टील प्रोडक्शन को बढ़ावा:
यह स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप दोनों कंपनियों की प्रोक्योरमेंट (procurement) और इंडस्ट्रियल प्रोसस (industrial processes) में क्लाइमेट कंसीडरेशन (climate considerations) को शामिल करती है। EcoZen का इस्तेमाल करके, Tata Steel अपने Scope 3 उत्सर्जन में ज़बरदस्त कमी ला सकती है। यह Tata Steel के ग्रीन स्टील प्रोडक्शन के विज़न को सपोर्ट करता है और भारत की डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) की कोशिशों के साथ तालमेल बिठाता है।
ग्रीन इनिशिएटिव्स का बैकग्राउंड:
HZL ने नवंबर 2025 में EcoZen ब्रांड लॉन्च किया था, जिसे रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) का उपयोग करके बनाया गया एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक बताया गया है। कंपनी जनवरी 2026 में Silox India के साथ भी इसी तरह की पार्टनरशिप की घोषणा कर चुकी है। वहीं, Tata Steel का लक्ष्य 2045 तक CO2 न्यूट्रल बनना और 2030 तक महत्वपूर्ण उत्सर्जन कटौती हासिल करना है, जिसके लिए वे क्लीनर टेक्नोलॉजी और एनर्जी सोर्स पर काम कर रहे हैं।
जांच और चुनौतियाँ:
इस प्रगति के बावजूद, Tata Steel पहले से ही एनवायर्नमेंटल (environmental) और रेगुलेटरी (regulatory) जांच के दायरे में है। दिसंबर 2024 में, Tata Steel Netherlands पर एमिशन स्टैंडर्ड (emission standard) के उल्लंघन के लिए €27 मिलियन का जुर्माना लगाया गया था, और उन पर स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कथित प्रभावों को लेकर $1.6 बिलियन का लीगल क्लेम भी चल रहा है। भारत में, Tata Steel 2015 और 2023 के बीच कथित प्राइस कोल्यूजन (price collusion) के लिए कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की जांच के दायरे में है। इसके अलावा, EcoZen के लो-कार्बन अप्रोच की सफलता स्टील और गैल्वेनाइजिंग सेक्टर के अन्य प्लेयर्स द्वारा इसके एडॉप्शन पर निर्भर करती है।
मार्केट का माहौल:
HZL कॉम्पिटिटिव जिंक और लेड मार्केट में Gravita India Ltd. और Nile Ltd. जैसे प्लेयर्स के साथ मुकाबला करती है। प्रमुख इंडस्ट्रियल पार्टनर्स जैसे Tata Steel के साथ EcoZen जैसे लो-कार्बन सॉल्यूशंस को इंटीग्रेट करने पर HZL का फोकस इसे एक महत्वपूर्ण डिफ्रेंशिएटर (differentiator) बनाता है। डीकार्बोनाइज करने के अपने प्रयासों में, Tata Steel ग्लोबली और डोमेस्टिकली उन स्टील मैन्युफैक्चरर्स से प्रतिस्पर्धा करती है जो कम उत्सर्जन के लिए प्रयासरत हैं।
आगे क्या देखें:
आगे चलकर, Tata Steel द्वारा EcoZen को अपनाना और अन्य इंडस्ट्रियल यूजर्स तक इसका विस्तार देखना अहम होगा। निवेशक इस पार्टनरशिप से होने वाली वास्तविक उत्सर्जन कटौती पर भी नज़र रखेंगे, साथ ही Tata Steel के 'ग्रीन स्टील' टारगेट्स की ओर प्रगति पर भी। भारत में लो-कार्बन इंडस्ट्रियल मैटेरियल्स को सपोर्ट करने वाले रेगुलेशन (regulation) या इंसेंटिव (incentive) का विकास भी महत्वपूर्ण संकेत देगा।
