FY26 में मुनाफे का भारी पतन
HLV Ltd ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कुल रेवेन्यू पिछले वित्तीय वर्ष के ₹218.40 करोड़ की तुलना में 1.89% घटकर ₹214.27 करोड़ रहा। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता नेट प्रॉफिट को लेकर है, जो पिछले साल के ₹26.13 करोड़ से 92.04% लुढ़ककर महज़ ₹2.08 करोड़ पर आ गया है। कंपनी के कुल खर्चों में बढ़ोत्तरी (जो ₹19,309 लाख से बढ़कर ₹20,916 लाख हो गए) इस भारी गिरावट का मुख्य कारण बनी है।
चौथी तिमाही (Q4) में कुछ राहत
सालाना नतीजों में गिरावट के बावजूद, HLV Ltd ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में रेवेन्यू के मोर्चे पर कुछ सुधार दिखाया है। इस तिमाही में कुल रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के ₹63.45 करोड़ से 6.64% बढ़कर ₹67.66 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, Q4 FY26 में कंपनी ने ₹8.60 करोड़ का नेट प्रॉफिट भी दर्ज किया।
₹982 करोड़ का AAI विवाद बना बड़ी चिंता
कंपनी की वित्तीय सेहत पर सबसे बड़ा ग्रहण एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ चल रहे एक बड़े कानूनी विवाद का है। यह विवाद कुल ₹982.57 करोड़ का है, जो कि बकाया लीज रेंट और जमीन के इस्तेमाल पर रॉयल्टी से जुड़ा है। कंपनी के ऑडिटर्स ने बार-बार इन अनप्रोवाइडेड देनदारियों (unprovided liabilities) की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी है कि यह HLV Ltd की 'गोइंग कंसर्न' (समस्याओं के बावजूद कंपनी के चलते रहने की क्षमता) की स्थिति के लिए एक बड़ा खतरा है। यह राशि कंपनी के सालाना रेवेन्यू से कहीं ज्यादा है, जो गंभीर वित्तीय अनिश्चितता पैदा करती है।
ITC का केस भी खड़ा कर रहा सिरदर्द
कानूनी मोर्चों पर बढ़ती मुश्किलों के बीच, HLV Ltd एक माइनॉरिटी शेयरहोल्डर, ITC Ltd, की ओर से भी मुकदमे का सामना कर रही है। ITC ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में कंपनी पर उत्पीड़न (oppression) और कुप्रबंधन (mismanagement) का आरोप लगाते हुए केस दायर किया है। यह चल रही कानूनी कार्यवाही कंपनी के लिए और अधिक जटिलता और व्यवधान पैदा कर सकती है।
निवेशकों के लिए अनिश्चित भविष्य
मुनाफे में भारी गिरावट और बड़ी, अनप्रोवाइडेड कानूनी देनदारियों का यह मेल HLV Ltd के शेयरधारकों के लिए एक मुश्किल तस्वीर पेश कर रहा है। AAI विवाद में किसी भी प्रतिकूल नतीजे से कंपनी पर गंभीर वित्तीय बोझ पड़ सकता है, जो उसके संचालन और बाजार स्थिति को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों को AAI और ITC दोनों के कानूनी मामलों के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी होगी, साथ ही कंपनी द्वारा अपने बढ़ते खर्चों और रेवेन्यू के रुझानों को प्रबंधित करने के प्रयासों को भी देखना होगा।
