H.G. Infra Engineering Ltd. ने अपनी एक सब्सिडियरी को बेचकर ₹282 करोड़ से ज्यादा की रकम जुटाई है। यह कदम कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करेगा और भविष्य की ग्रोथ के लिए फंड जुटाने में मदद करेगा।
डील की डिटेल्स
कंपनी ने 23 अप्रैल, 2026 को H.G. Raipur Visakhapatnam OD-6 Private Limited के शेयर Neo Infra Income Opportunities Fund को बेचे। इस सौदे के तहत कुल ₹282.24 करोड़ का भुगतान किया जाना है। इसमें से ₹203.00 करोड़ डील फाइनल होते ही मिल गए हैं, जबकि बाकी रकम तय शर्तों के मुताबिक बाद में दी जाएगी। इस बिक्री के बाद, यह सब्सिडियरी अब H.G. Infra Engineering Ltd. का हिस्सा नहीं रहेगी।
फाइनेंशियल असर और स्ट्रेटेजी
इस सब्सिडियरी की FY25 (फाइनेंशियल ईयर 25) में कुल रेवेन्यू ₹329.10 करोड़ था, जबकि 31 मार्च, 2025 तक इसकी नेट वर्थ ₹132.19 करोड़ थी। यानी, कंपनी ने अपनी नेट वर्थ से दोगुने से भी ज्यादा कीमत पर सब्सिडियरी को बेचा है। हालांकि, एक अच्छी रेवेन्यू वाली यूनिट को बेचने का मतलब है कि कंपनी अब उस इनकम स्ट्रीम को छोड़ रही है।
यह कदम कंपनी की उस स्ट्रेटेजी का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने एसेट पोर्टफोलियो को बेहतर बनाना चाहती है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने या वर्किंग कैपिटल को बेहतर बनाने के लिए कर सकती है।
कंपनी और भविष्य की राह
H.G. Infra Engineering Ltd. भारत की एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है जो रोड, हाईवे, ब्रिज और अन्य इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के कंस्ट्रक्शन में लगी हुई है। यह कंपनी मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) सेगमेंट में काम करती है।
हालांकि, एक रेवेन्यू वाली यूनिट को बेचने से भविष्य के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है, अगर कंपनी नए प्रोजेक्ट्स हासिल नहीं कर पाती है। बाकी बचे पेमेंट की शर्तें भी अहम हैं।
पीयर कंपेरिजन
IRB Infrastructure Developers Ltd. और PNC Infratech Ltd. जैसी कंपनियां भी इसी सेक्टर में काम कर रही हैं। जबकि ये कंपनियां अपने ऑर्डर बुक्स बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, H.G. Infra का यह कदम एक पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग स्ट्रेटेजी की ओर इशारा करता है, जिसमें कंपनी किसी खास सेगमेंट से बाहर निकल रही है।
