डील पूरी, कंपनी को मिले ₹233.77 करोड़
H.G. Infra Engineering Limited ने हाल ही में अपनी सब्सिडियरी H.G. Khammam Devarapalle PKG-1 Private Limited का 49% हिस्सा Neo Infra Income Opportunities Fund को ₹233.77 करोड़ में बेच दिया है। इस ट्रांजैक्शन को 30 मार्च, 2026 को फाइनल किया गया है और कंपनी को एडवांस के तौर पर ₹81.69 करोड़ का भुगतान मिल चुका है।
स्ट्रेटेजिक मूव: क्यों बेची हिस्सेदारी?
यह कदम कंपनी की अपनी एसेट्स को ऑप्टिमाइज़ करने और कैपिटल जेनरेट करने की बड़ी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। इस पैसे का इस्तेमाल या तो कंपनी अपना कर्ज (Debt) कम करने के लिए करेगी या फिर इसे कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में लगाएगी। अच्छी बात यह है कि सब्सिडियरी अभी भी H.G. Infra के फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स में कंसोलिडेटेड (Consolidated) रहेगी, यानी कंपनी का ऑपरेशनल कंट्रोल अभी भी बना हुआ है।
भविष्य की योजना: पूरी तरह एग्जिट का प्लान
H.G. Infra का इरादा 30 जून, 2026 तक इस सब्सिडियरी की बची हुई 51% हिस्सेदारी भी बेचने का है। यह डील कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन साबित होगी, जिससे पूरी वैल्यू रियलाइज की जा सकेगी।
पुरानी डील्स से मिलता-जुलता पैटर्न
यह कोई पहली बार नहीं है जब H.G. Infra ने अपनी एसेट्स बेची हों। कंपनी ने हाल ही में अपनी एक दूसरी सब्सिडियरी, H.G. Khammam Devarapalle PKG-2 Private Limited, का 100% हिस्सा Neo Infra Income Opportunities Fund को ₹213.85 करोड़ में 20 मार्च, 2026 को बेचा था। इससे पहले, कंपनी ने सोलर प्रोजेक्ट वाली सब्सिडियरीज़ को Stockwell Solar Services जैसी कंपनियों को बेचकर अपने पोर्टफोलियो को ऑप्टिमाइज़ करने की स्ट्रेटेजी अपनाई है।
सब्सिडियरी की परफॉरमेंस कैसी है?
Finanical Year 2025 में, H.G. Khammam Devarapalle PKG-1 Private Limited ने ₹296.42 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया था, जो H.G. Infra के कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का 5.9% था। वहीं, 31 मार्च, 2025 तक इसकी नेट वर्थ ₹110.64 करोड़ थी, जो कंसोलिडेटेड नेट वर्थ का 2.2% था।
निवेशकों के लिए रिस्क क्या हैं?
एक बड़ी चिंता CBI की जांच है, जो कंपनी पर करप्शन के आरोपों को लेकर चल रही है। हालांकि जनवरी 2026 में हुई रेड्स के बाद कंपनी के CMD सहित अन्य अधिकारियों को बेल मिल चुकी है, फिर भी यह जांच कंपनी की रेपुटेशन या ऑपरेशन्स पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, बची हुई 51% हिस्सेदारी को 30 जून, 2026 की डेडलाइन तक बेचना, फाइनल टर्म्स और मार्केट कंडीशन्स पर निर्भर करेगा।
कॉम्पिटिटर्स कौन हैं?
H.G. Infra Engineering इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है। इसके मुख्य कॉम्पिटिटर्स में Larsen & Toubro Ltd. (L&T), IRB Infrastructure Developers Ltd., PNC Infratech Ltd., और GR Infraprojects Ltd. जैसी बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां शामिल हैं, जो बड़े रोड और हाईवे प्रोजेक्ट्स में एक्टिव हैं।
निवेशक किन बातों पर नजर रखेंगे?
निवेशकों के लिए सबसे अहम होगा 30 जून, 2026 तक बची हुई 51% हिस्सेदारी की बिक्री का सफलतापूर्वक पूरा होना। साथ ही, यह भी देखना होगा कि H.G. Infra इस कैपिटल का इस्तेमाल कैसे करती है। CBI जांच और इसके कंपनी पर पड़ने वाले असर पर भी पैनी नजर रखनी होगी। इसके अलावा, इस आंशिक विनिवेश (Divestment) के बाद सब्सिडियरी की फाइनेंशियल परफॉरमेंस और H.G. Infra के कंसोलिडेटेड रिजल्ट्स पर इसका क्या असर पड़ता है, यह भी निवेशक देखेंगे।
