HCC के नतीजे: मुनाफा तो बढ़ा, पर चिंताएं भी कम नहीं!
Hindustan Construction Company (HCC) ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 142.36% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो ₹205.81 करोड़ पर पहुंच गया। इस शानदार उछाल का मुख्य श्रेय ₹999.99 करोड़ के राइट्स इश्यू (Rights Issue) और कंपनी के भारी कर्ज में की गई बड़ी कटौती को जाता है।
वहीं, चौथी तिमाही (Q4 FY26) में HCC का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹1,017.51 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹58.94 करोड़ दर्ज किया गया। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि (Q4 FY25) के मुकाबले कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 26.91% की गिरावट आई है, जो ₹1,392.20 करोड़ से घटकर ₹1,017.51 करोड़ हो गया।
पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 46.96% बढ़कर ₹165.52 करोड़ हो गया, जबकि FY25 में यह ₹112.63 करोड़ था। लेकिन, FY26 में कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 28.74% गिरकर ₹4,080.94 करोड़ पर आ गया, जो FY25 में ₹5,726.57 करोड़ था।
ऑडिटर की चिंताएं और रेवेन्यू पर दबाव
कंपनी के स्टैंडअलोन प्रॉफिट में इजाफा HCC के लिए अच्छी बात है, जो कर्ज घटाने और राइट्स इश्यू से मिली मजबूती को दर्शाता है। इससे ब्याज खर्च में कमी आने की उम्मीद है, जो भविष्य में मुनाफे को सपोर्ट कर सकता है।
लेकिन, कंपनी को कुछ गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन पर ऑडिटर ने भी चिंता जताई है। ये चिंताएं कंपनी की भविष्य की वित्तीय रिपोर्टिंग और एसेट वैल्यूएशन पर असर डाल सकती हैं:
- सब्सिडियरी में निवेश: ऑडिटर को ₹1,152.77 करोड़ के सब्सिडियरी HCC इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लिमिटेड (HICL) में निवेश की रिकवरी पर संदेह है, क्योंकि HICL की नेट वर्थ काफी कम हो गई है।
- डेफर्ड टैक्स एसेट्स: ₹173.91 करोड़ के डेफर्ड टैक्स एसेट्स (Deferred Tax Assets) को लेकर अनिश्चितता है, क्योंकि ऑडिटर इसके आधार पर किए गए अनुमानों को स्वतंत्र रूप से वेरिफाई नहीं कर पाए।
- प्राप्य (Receivables) और अधूरे प्रोजेक्ट: ₹197 करोड़ से अधिक के प्राप्य (Receivables) और पूरे हो चुके या रुके हुए प्रोजेक्ट्स के लिए बिना बिल वाले काम की रिकवरी पर भी सवाल उठाए गए हैं।
लगातार गिरता हुआ कंसोलिडेटेड रेवेन्यू यह भी संकेत देता है कि कंपनी के पास प्रोजेक्ट पाइपलाइन में कुछ समस्याएं हो सकती हैं या एग्जीक्यूशन में दिक्कतें आ रही हैं।
आगे क्या?
HCC पर ऐतिहासिक रूप से कर्ज का बोझ रहा है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आम बात है। कंपनी रणनीतिक तौर पर कर्ज घटाने पर काम कर रही है। निवेशक अपने ₹12,971 करोड़ के बड़े ऑर्डर बुक को रेवेन्यू और कैश फ्लो में बदलने की HCC की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे। मैनेजमेंट की ऑडिटर की चिंताओं पर प्रतिक्रिया और रेवेन्यू में गिरावट को थामने या पलटने के संकेत कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन के लिए अहम होंगे।