यह फैसला Hindustan Construction Company Ltd (HCC) के बोर्ड की बैठक में लिया गया, जहां ₹800 करोड़ तक की राशि जुटाने की योजना को हरी झंडी दिखाई गई। यह फंड इक्विटी शेयर या अन्य इक्विटी-लिंक्ड सिक्योरिटीज के माध्यम से जुटाए जाएंगे, जिसके लिए कंपनी Qualified Institutional Placement (QIP), प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट या राइट्स इश्यू जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।
इसी के साथ, बोर्ड ने कंपनी की अधिकृत शेयर कैपिटल को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹400 करोड़ करने की भी मंजूरी दे दी है। यह कदम भविष्य में पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को और सुचारू बनाएगा और कंपनी को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा।
इस नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी अपने विकास (growth) की पहलों को बढ़ावा देने या वित्तीय पुनर्गठन (financial restructuring) के लिए कर सकती है। HCC पहले भी अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए विभिन्न वित्तीय साधनों का इस्तेमाल करती रही है। कंपनी ने हाल ही में 2024 की शुरुआत में एक बड़े डेट रीस्ट्रक्चरिंग और रीफाइनेंसिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया था।
हालांकि, यह पूरी योजना नियामक संस्थाओं (regulatory approvals) और शेयरधारकों (shareholder approvals) की मंजूरी पर निर्भर करेगी। यह भी संभव है कि फंड जुटाने के तरीके के आधार पर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी (shareholding) में कुछ कमी आए।
आंकड़ों पर नजर डालें तो, फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक, HCC का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू लगभग ₹9,500 करोड़ रहने का अनुमान था, जबकि नेट प्रॉफिट ₹150 करोड़ के आसपास था। कंपनी पर लगभग ₹5,000 करोड़ का कंसॉलिडेटेड डेट था, जिससे डेट-टू-इक्विटी रेशियो लगभग 1.5x था।
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि HCC फंड जुटाने के लिए कौन से विशिष्ट तरीके अपनाती है, साथ ही नियामक और शेयरधारक मंजूरी मिलने में कितना समय लगता है। साथ ही, जुटाई गई पूंजी का उपयोग कैसे किया जाएगा, इस पर भी कंपनी की अगली घोषणाओं पर नजर रहेगी।
