SEBI के डीमैट नियम और H S India Ltd की पहल
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के निर्देशों के तहत, सभी लिस्टेड कंपनियों के लिए अपने सभी शेयरों को डीमैट (Dematerialized) रूप में बदलना अनिवार्य हो गया है। इसी कड़ी में, H S India Ltd ने अपने उन शेयरधारकों के लिए एक विशेष सुविधा (Special Window) शुरू की है, जिनके पास फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट हैं।
क्या है इस खास विंडो की जानकारी?
कंपनी ने 30 अप्रैल 2026 को यह ऐलान किया है कि शेयरधारक फिजिकल शेयरों के ट्रांसफर रिक्वेस्ट को दोबारा जमा कर सकते हैं। यह सुविधा SEBI द्वारा जारी 2 जुलाई 2025 और 30 जनवरी 2026 के सर्कुलर के बाद दी गई है। इस बारे में कंपनी की वेबसाइट के साथ-साथ अंग्रेजी और मराठी अखबारों में भी जानकारी प्रकाशित की गई है।
डीमैट क्यों ज़रूरी है?
SEBI का मकसद सभी लिस्टेड सिक्योरिटीज को इलेक्ट्रॉनिक रूप में लाना है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है, फिजिकल सर्टिफिकेट्स से जुड़े धोखाधड़ी के रिस्क कम होते हैं और सेटलमेंट की प्रक्रिया तेज होती है। H S India Ltd जैसी कंपनियों के लिए भी यह नियमों का पालन करने और अपने शेयरधारक रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करने का एक जरिया है।
शेयरधारकों पर असर
जिन शेयरधारकों के पास अभी भी फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट हैं, उनके लिए ट्रांसफर रिक्वेस्ट प्रोसेस करने का यह एक तय समय है। कंपनी ने इन रिक्वेस्ट्स को दोबारा जमा करने के लिए एक सुनियोजित प्रक्रिया (structured process) तैयार की है, जिससे डिजिटल होल्डिंग्स को मैनेज करने की चाह रखने वाले शेयरधारकों को आसानी हो।
इंडस्ट्री में क्या चल रहा है?
इस दिशा में, Raymond Ltd और Arvind Fashions Ltd जैसी कंपनियां भी SEBI के डीमैट नियमों का पालन कर रही हैं। कई अन्य लिस्टेड फर्म भी शेयरधारकों को फिजिकल शेयरों को डिजिटल फॉर्मेट में बदलने में मदद करने के लिए इसी तरह की विशेष विंडो खोल रही हैं।
