SEBI के नियमों से मिली राहत
Gujarat Intrux Limited ने BSE को दी जानकारी में बताया है कि वह SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के मापदंडों पर खरी नहीं उतरती है। कंपनी के लेटेस्ट फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स और SEBI के सर्कुलर के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक कंपनी पर कोई भी बकाया उधार (borrowing) नहीं है, यानी यह शून्य है।
क्यों है यह बड़ी राहत?
'लार्ज कॉर्पोरेट' के तौर पर वर्गीकृत होने पर कंपनियों को SEBI के कड़े डिस्क्लोजर नियमों और अतिरिक्त अनुपालन (compliance) की जिम्मेदारियों का पालन करना पड़ता है। इस स्टेटस से बाहर रहने के कारण Gujarat Intrux को इन औपचारिकताओं से छूट मिल गई है, जिससे कंपनी का रेगुलेटरी रिपोर्टिंग का काम आसान हो गया है।
SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' मापदंड क्या हैं?
SEBI ने कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देने और डेट फाइनेंसिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क पेश किया था। 2018 में ₹100 करोड़ के उधार की सीमा से शुरू होकर, इसे 19 अक्टूबर 2023 को संशोधित किया गया। वर्तमान मापदंडों के अनुसार, एक 'लार्ज कॉर्पोरेट' वह इकाई है जिसके लिस्टेड सिक्योरिटीज हों, ₹1000 करोड़ से अधिक का लॉन्ग-टर्म बरोइंग हो, और 'AA' या उससे ऊपर की क्रेडिट रेटिंग हो।
Gujarat Intrux के इन ऊंचे पैमानों पर खरा न उतरने के कारण, कंपनी को अनिवार्य डेट सिक्योरिटी फंडरेज़िंग और अतिरिक्त पीरियोडिक डिस्क्लोजर से बचना पड़ा है। यह प्रक्रियात्मक आसानी कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग को सरल बनाती है।
किन अन्य कंपनियों को भी मिली है छूट?
Gujarat Intrux के अलावा, Alacrity Securities, UTL Industries, Signature Green Corp, और VIP Industries जैसी कंपनियों ने भी हाल ही में 'नॉन-लार्ज कॉर्पोरेट' स्टेटस की पुष्टि की है। इन सभी कंपनियों ने ₹1000 करोड़ की सीमा से कम उधार या शून्य बकाया डेट का हवाला देकर इस छूट का लाभ उठाया है।
