Greaves Cotton: निवेशकों की चांदी! FY26 में ₹200 करोड़ का दमदार मुनाफा, कंसोलिडेटेड बिजनेस भी मुनाफे में

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Greaves Cotton: निवेशकों की चांदी! FY26 में ₹200 करोड़ का दमदार मुनाफा, कंसोलिडेटेड बिजनेस भी मुनाफे में
Overview

Greaves Cotton ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए धमाकेदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स **7.6%** बढ़कर **₹200.07 करोड़** पर पहुंच गया है। वहीं, कंपनी का कंसोलिडेटेड बिजनेस, जो पिछले साल घाटे में था, अब **₹35.29 करोड़** के मुनाफे में आ गया है। इन शानदार परफॉर्मेंस के बीच, बोर्ड ने **₹2 प्रति शेयर** के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Greaves Cotton ने FY26 में दर्ज की मजबूत ग्रोथ, कंसोलिडेटेड बिजनेस ने मारी यू-टर्न

Greaves Cotton ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में शानदार परफॉर्मेंस दिखाया है। कंपनी के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स के मुताबिक, स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 7.6% बढ़कर ₹200.07 करोड़ दर्ज किया गया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कंपनी का कंसोलिडेटेड बिजनेस, जो पिछले साल घाटे में चल रहा था, अब ₹35.29 करोड़ के मुनाफे में आ गया है।

बोर्ड की मंजूरी और डिविडेंड का ऐलान

6 मई 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में कंपनी के FY26 के नतीजे मंजूर किए गए। इस दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस ₹2,409.59 करोड़ रहा, जो पिछले साल से ज्यादा है। कंसोलिडेटेड लेवल पर रेवेन्यू ₹3,436.62 करोड़ दर्ज किया गया। नतीजों के साथ ही, कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों के लिए ₹2 प्रति शेयर (100%) के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है, जो ₹2 फेस वैल्यू पर आधारित है।

यह नतीजे क्यों हैं खास?

यह परफॉर्मेंस कंपनी की स्ट्रेटेजिक पहलों की सफलता को दर्शाता है। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट का घाटे से निकलकर मुनाफे में आना एक बड़ी उपलब्धि है। यह इफेक्टिव कॉस्ट मैनेजमेंट और ई-मोबिलिटी सहित विभिन्न बिजनेस सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ का संकेत देता है।

कंपनी का भविष्य और स्ट्रेटेजी

Greaves Cotton, जो पहले इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) के लिए जानी जाती थी, अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (E-mobility) में तेजी से कदम बढ़ा रही है। कंपनी 'ट्रांसफॉर्म एंड स्केल' स्ट्रेटेजी पर काम कर रही है, जिसमें ट्रेडिशनल ICE बिजनेस को बेहतर बनाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) आर्म, Greaves Electric Mobility (GEM) को आक्रामक रूप से बढ़ाना शामिल है। कंपनी ने R&D और EV मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में भारी निवेश किया है।

शेयरधारकों को सीधा फायदा

शेयरहोल्डर्स को ₹46.58 करोड़ के कुल डिविडेंड का फायदा मिल सकता है, जो प्रति शेयर ₹2 है। कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में यह टर्नअराउंड निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकता है और कंपनी के डाइवर्सिफिकेशन प्लान को मजबूती देता है।

कॉम्पिटिटर्स की स्थिति

Greaves Cotton के प्रमुख कॉम्पिटिटर्स में Bosch Ltd. और Cummins India Ltd. जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो इंजन और कंपोनेंट सेक्टर में हैं और ICE से EV की ओर ट्रांजिशन कर रही हैं। TVS Motor Company जैसी कंपनियां भी इस स्पेस में हैं, जहाँ Greaves अपने GEM डिवीजन को तेजी से स्केल कर रही है।

आगे क्या देखना है

आगे निवेशकों की नजर ₹2 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर की मंजूरी पर होगी। साथ ही, Greaves Electric Mobility (GEM) डिवीजन की ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी, नए प्रोडक्ट्स, मार्केट शेयर और कंसोलिडेटेड व स्टैंडअलोन दोनों फ्रंट पर रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.