Glen Industries की IPO रिपोर्ट बताती है कि कंपनी अपने ₹62.94 करोड़ के IPO फंड्स का इस्तेमाल तय योजना के अनुसार ही कर रही है. जुलाई 2025 में IPO से जुटाई गई रकम में से ₹56.59 करोड़ प्रोजेक्ट्स के लिए उपलब्ध थे. Infomerics Valuation and Rating Limited ने इस बात की पुष्टि की है कि फंड्स का इस्तेमाल कंपनी के प्रोजेक्ट ऑब्जेक्टिव्स और तय समय-सीमा के हिसाब से हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले हाफ में ₹7.55 करोड़ खर्च हुए, जिससे 31 मार्च 2026 तक कुल ₹33.74 करोड़ का फंड इस्तेमाल हो चुका था. वहीं, ₹22.85 करोड़ अभी भी अनयूटिलाइज्ड (unutilized) यानी इस्तेमाल नहीं हुए थे.
एग्जीक्यूशन में क्यों आ रही है रुकावट?
फंड के इस्तेमाल की पुष्टि के बावजूद, रिपोर्ट में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन (execution) को लेकर कई गंभीर चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है. कंपनी का लक्ष्य Q4 FY 2025-26 में कमर्शियल प्रोडक्शन (commercial production) शुरू करना था, लेकिन रेगुलेटरी अप्रूवल्स (regulatory approvals) में देरी के कारण यह संभव नहीं हो पाया. इतना ही नहीं, इस देरी को शेयरहोल्डर्स (shareholders) से मंजूरी भी नहीं मिली है, जो ICDR गाइडलाइन्स (guidelines) के तहत जरूरी है.
फंड मिक्सिंग और प्री-IPO खर्चों पर भी सवाल
रिपोर्ट में IPO फंड्स को अन्य खातों के साथ मिक्स करने की बात पर भी चिंता जताई गई है. कंपनी ने ओवरड्राफ्ट फैसिलिटीज (overdraft facilities) और अन्य स्रोतों से ₹14.06 करोड़ का भुगतान किया है, जिससे स्वतंत्र वेरिफिकेशन (verification) मुश्किल हो गया है. इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी प्रोजेक्ट पर ₹4.57 करोड़ का खर्च IPO प्रोसीड्स (proceeds) उपलब्ध होने से पहले ही कर दिया गया था.
निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी शेयरहोल्डर्स की मंजूरी, जरूरी रेगुलेटरी क्लीयरेंस (clearances) हासिल करने और ओवरड्राफ्ट से इस्तेमाल हुए फंड्स के तालमेल (reconciliation) पर क्या अपडेट देती है. नए प्लांट में कमर्शियल प्रोडक्शन का शुरू होना एक अहम मील का पत्थर साबित होगा.
