SEBI का बड़ा फैसला: फिजिकल शेयर ट्रांसफर के लिए मिला और समय
SEBI ने यह कदम शेयरधारकों को राहत देने और निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उठाया है। इस एक्सटेंशन के बाद, अब ऐसे निवेशक जिनके फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट 1 अप्रैल, 2019 से पहले ट्रांसफर के लिए जमा किए गए थे और किन्हीं कारणों से रिजेक्ट हो गए थे, वे 4 फरवरी, 2027 तक अपने कागजात दोबारा जमा कर सकते हैं।
शेयरधारकों के लिए क्यों है ये अहम?
यह फैसला उन निवेशकों के लिए अंतिम मौका है जो अपने फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट से जुड़े पुराने मामलों को निपटाना चाहते हैं। इस एक्सटेंशन से वे अपनी ओनरशिप (ownership) को रेगुलराइज़ (regularize) कर सकेंगे और अपने होल्डिंग्स को डीमैट (dematerialised) फॉर्म में बदलवा सकेंगे।
फिजिकल शेयर ट्रांसफर का बैकग्राउंड
SEBI ने 1 अप्रैल, 2019 से फिजिकल फॉर्म में सिक्योरिटीज के ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी। इसके बाद, ऐसे डीज़ को दोबारा फाइल करने के लिए 31 मार्च, 2021 तक की एक स्पेशल विंडो खोली गई थी। लेकिन, कई निवेशकों और शेयर रजिस्ट्रार्स ने बताया कि वे इस डेडलाइन को मिस कर गए। एक्सपर्ट्स की सिफारिशों पर SEBI ने निवेशकों के अधिकारों की सुरक्षा और चिंताओं को दूर करने के लिए इस नई, बढ़ी हुई विंडो को पेश करने का फैसला किया।
शेयरधारकों को क्या करना होगा?
जिन शेयरधारकों के पास ऐसे फिजिकल शेयर ट्रांसफर डीज़ हैं, उन्हें 4 फरवरी, 2027 की डेडलाइन से पहले सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स Gillette India के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट (RTA) को जमा करने होंगे। इस बढ़ी हुई अवधि के दौरान जमा की गई सिक्योरिटीज को डीमैट फॉर्म में जारी किया जाएगा।
ऐतिहासिक संदर्भ
निवेशकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके डॉक्यूमेंट्स पूरे हों ताकि इस एक्सटेंडेड पीरियड में कोई रिजेक्शन न हो। हालांकि, यह फाइलिंग सीधे कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस या गवर्नेंस से नहीं जुड़ी है, लेकिन Gillette India अतीत में मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स (minimum public shareholding norms) को लेकर रेगुलेटरी जांच के दायरे में रही है।
मुख्य तारीखें
ट्रांसफर रिक्वेस्ट को दोबारा फाइल करने के लिए यह स्पेशल विंडो 5 फरवरी, 2026 से शुरू होकर 4 फरवरी, 2027 तक खुली रहेगी।
