Genus Power का बड़ा फैसला: शेयरधारकों के लिए क्या है मायने?
Genus Power Infrastructures Ltd ने अपने शेयरधारकों के लिए एक ज़रूरी कदम उठाया है। कंपनी के स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट बिज़नेस को Genus Prime Infra Limited नाम की एक नई कंपनी में अलग कर दिया गया है। इस स्कीम को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 24 अप्रैल, 2025 को मंजूरी दे दी है।
इस डीमर्जर (Demerger) का मुख्य उद्देश्य बिज़नेस लाइन्स को साफ करना और कंपनी की कोर ऑपरेशंस व स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट्स के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ बनाना है। शेयरधारकों के लिए, अब अपने ओरिजिनल Genus Power शेयर की लागत को दोनों नई कंपनियों के बीच बांटना ज़रूरी होगा, खासकर टैक्स और अकाउंटिंग एडजस्टमेंट्स के लिए।
कंपनी ने एक शेयर स्वैप रेश्यो (Share Swap Ratio) भी तय किया है: हर 6 Genus Power शेयर (जिसका फेस वैल्यू ₹1 है) के बदले 1 Genus Prime Infra शेयर (जिसका फेस वैल्यू ₹2 है) मिलेगा।
Genus Power Infrastructures Ltd भारतीय पावर सेक्टर में एक्टिव है। यह बिजली मीटर बनाने, पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सेवाएं देने, और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स डेवलप करने जैसे कामों में शामिल है।
पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन EPC सेक्टर में Genus Power के मुकाबले KEC International Ltd और Kalpataru Power Transmission Ltd जैसी कंपनियां हैं। वहीं, बिजली मीटरिंग और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में HPL Electric & Power Ltd इसके कॉम्पिटिटर हैं।
यह लागत बंटवारे का मार्गदर्शन केवल सामान्य जानकारी के लिए है। कंपनी का कहना है कि नियामक या न्यायिक निकाय इसे अलग तरह से समझ सकते हैं, और वे इसकी सटीकता के लिए कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेते। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे Genus Power द्वारा जारी की गई लागत बांटने की गाइडलाइन्स को ध्यान से पढ़ें और सटीक टैक्स और अकाउंटिंग के लिए अपने टैक्स एडवाइजर और अकाउंटेंट से सलाह ज़रूर लें।