Genus Power का शानदार प्रदर्शन, पर ED जांच का साया!
Genus Power Infrastructures Ltd. ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में ₹4,750.92 करोड़ और नेट प्रॉफिट में ₹592.30 करोड़ की शानदार कमाई की है। ये नतीजे ₹25,173 करोड़ (टैक्स छोड़कर) के बड़े एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक से समर्थित हैं, जो कंपनी के भविष्य के लिए मजबूत राजस्व संभावनाओं का संकेत देते हैं।
नेतृत्व में बदलाव और अहम नियुक्तियां
वित्तीय नतीजों के साथ, कंपनी ने नेतृत्व में एक अहम बदलाव की घोषणा की है। 18 मई 2026 से विनोद Raheja ने नए चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का पदभार संभाला है। उन्होंने नाथू लाल नामा का स्थान लिया है, जो अब होल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे। इसके अलावा, K. G. Goyal & Associates को FY 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर नियुक्त किया गया है।
कानूनी पेंच: ED की जांच का मामला
जहां एक ओर मजबूत नतीजे और बड़ा ऑर्डर बुक कंपनी की ग्रोथ को दर्शाते हैं, वहीं दूसरी ओर डायरेक्टोरेट ऑफ एन्फोर्समेंट (ED) की चल रही जांच एक बड़ी अनिश्चितता पैदा कर रही है। यह जांच मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है। ED ने 3 दिसंबर 2024 को कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस और चेयरमैन के आवास पर तलाशी ली थी। कंपनी को अब पटना स्थित PMLA कोर्ट में पेश होने का नोटिस भी मिला है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
Genus Power के शेयरहोल्डर्स के लिए यह एक मिश्रित स्थिति है। एक तरफ मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और भारी ऑर्डर बुक भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ED जांच का नतीजा कंपनी के गवर्नेंस और भविष्य के बिजनेस पर असर डाल सकता है। नए CFO की नियुक्ति रणनीतिक Moves में अहम भूमिका निभाएगी। ₹25,173 करोड़ के ऑर्डर बुक को समय पर पूरा करना कंपनी के लिए विकास बनाए रखने की कुंजी होगी।
मुख्य जोखिम
सबसे बड़ा जोखिम ED द्वारा की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग की जांच है। पटना स्थित PMLA कोर्ट में कंपनी की अगली पेशी पर सभी की निगाहें रहेंगी।