कंपनी बोर्ड में शामिल हुईं धृति साटिया
Garuda Construction and Engineering Ltd ने 21 अप्रैल, 2026 को घोषणा की है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने श्रीमती धृति हर्ष साटिया को कंपनी का नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया है। यह नियुक्ति कंपनी के नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिशों पर आधारित है, जिसका मुख्य उद्देश्य कंपनी के गवर्नेंस ढांचे को और बेहतर बनाना है। श्रीमती साटिया का यह पद तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, हालांकि इसे शेयरधारकों की आगामी जनरल मीटिंग (General Meeting) में मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
गवर्नेंस में क्यों है यह नियुक्ति अहम?
इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स कंपनी के फैसलों में निष्पक्षता लाते हैं, माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा करते हैं और जवाबदेही बढ़ाते हैं। श्रीमती साटिया जैसी अनुभवी इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति से Garuda Construction में बेहतर गवर्नेंस की ओर एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है।
कंपनी की स्थिति और चुनौतियाँ
Garuda Construction एक सिविल कंस्ट्रक्शन फर्म है और अब प्रमोटर ग्रुप के अलावा तीसरे पक्ष के कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी काम कर रही है। कंपनी के पास ₹1,408 करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक है।
हालांकि, कंपनी को अपनी वित्तीय सेहत को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा है। 30 अप्रैल, 2024 तक, ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) ₹182 करोड़ थे, जो बैलेंस शीट का 77% हिस्सा थे। यह लंबे समय से चली आ रही देनदारी (Debtor Days) और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। पिछले कुछ रिपोर्ट्स में FY24 में रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में गिरावट भी देखी गई थी। प्रमोटर प्रवीण कुमार बृजेंद्र कुमार अग्रवाल के खिलाफ एक लंबित आपराधिक मामला (Criminal Case) भी गवर्नेंस से जुड़ी एक और जटिलता है। इसके अलावा, ज़रूरी परमिट (Permits) मिलने में देरी के कारण प्रोजेक्ट्स में विलंब भी हो रहा है।
निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम
- बढ़ते देनदार और वर्किंग कैपिटल: ट्रेड रिसीवेबल्स का भारी होना (77% of balance sheet) देनदार दिनों के लंबे होने और वर्किंग कैपिटल पर दबाव का संकेत देता है।
- प्रमोटर पर कानूनी कार्रवाई: प्रमोटर प्रवीण कुमार बृजेंद्र कुमार अग्रवाल के खिलाफ लंबित आपराधिक मामला कंपनी की प्रतिष्ठा और संचालन के लिए जोखिम पैदा करता है।
- उद्योग की अस्थिरता: कंस्ट्रक्शन सेक्टर स्वाभाविक रूप से अस्थिर होता है और रियल एस्टेट मार्केट में बदलावों से प्रभावित होता है।
- परमिट में देरी: आवश्यक परमिट प्राप्त करने में देरी प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है।
- क्लाइंट निर्भरता: कंपनी अपने टॉप क्लाइंट्स पर बहुत अधिक निर्भर करती है, जिनमें से कई प्रमोटरों से जुड़े हैं, जिससे निर्भरता का जोखिम बना रहता है।
