Garuda Construction के FY26 नतीजे: प्रॉफिट और रेवेन्यू में तूफानी तेजी, पर बरपा कर्ज़ का साया!
Garuda Construction and Engineering Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए शानदार वित्तीय प्रदर्शन की घोषणा की है। कंपनी ने कंसॉलिडेटेड आधार पर ₹533.96 करोड़ की कुल आय दर्ज की, जो पिछले साल के ₹227.41 करोड़ से 134.80% अधिक है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 145.89% की जोरदार उछाल आई, जो ₹49.80 करोड़ से बढ़कर ₹122.45 करोड़ हो गया। चौथे क्वार्टर (Q4 FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा, जिसमें रेवेन्यू में 80.52% की वृद्धि के साथ ₹148.64 करोड़ की आय और ₹34.39 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया।
क्यों मायने रखती है ये खबर?
यह नतीजे कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता को दर्शाते हैं, जिसने रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ को बढ़ावा दिया है। कंपनी के ऑडिटर्स ने भी बिना किसी बड़ी आपत्ति के अपनी रिपोर्ट दी है, जो वित्तीय रिपोर्टिंग की सटीकता पर भरोसा बढ़ाती है।
पर कहां है असली चिंता?
इन शानदार आंकड़ों के बीच, कंपनी की स्टैंडअलोन बरोइंग्स (उधार) में हुई अत्यधिक वृद्धि निवेशकों के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग है। स्टैंडअलोन करंट बरोइंग्स ₹4.42 लाख से बढ़कर ₹1,202.12 लाख हो गई हैं, जो 270 गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी है। इसके साथ ही, स्टैंडअलोन ट्रेड रिसीवेबल्स में भी लगभग ₹6,000 लाख की वृद्धि देखी गई है, जो अब ₹24,041.37 लाख पर पहुंच गए हैं। इसका मतलब है कि कंपनी का एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों से आने वाले अनपेड इनवॉइस में फंसा हुआ है। यह स्थिति कंपनी की वर्किंग कैपिटल और लिक्विडिटी पर गंभीर दबाव डाल सकती है, साथ ही ब्याज खर्चों में भी इजाफा कर सकती है।
पीयर कंपैरिजन (Peer Comparison)
Garuda Construction का FY26 रेवेन्यू ₹533.96 करोड़ है, जो PNC Infratech (FY24 रेवेन्यू ₹8,661 करोड़) और HG Infra Engineering (FY24 रेवेन्यू ₹5,271 करोड़) जैसे बड़े प्लेयर्स की तुलना में कम है। हालांकि, FY26 में 134.80% की कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ दर, कई बड़े प्रतिद्वंद्वियों की ग्रोथ से काफी बेहतर है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को मैनेजमेंट से बरोइंग्स में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के पीछे के कारणों और उन्हें कम करने की रणनीति पर स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा। साथ ही, बकाया ट्रेड रिसीवेबल्स को वसूलने के लिए कंपनी की योजनाओं और समय-सीमा पर भी नजर रखनी होगी। कंपनी की फ्यूचर ऑर्डर बुक और ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।