SEBI ने क्यों दी छूट?
SEBI ने 20 मार्च 2026 को Gallantt Trust को यह विशेष छूट दी। इस छूट का मतलब है कि अब ट्रस्ट शेयर हासिल करने के लिए अनिवार्य पब्लिक ओपन ऑफर (Public Open Offer) नहीं देगा। यह कदम Gallantt Ispat Limited के प्रमोटर ग्रुप के आंतरिक पुनर्गठन (Internal Reorganization) के लिए बेहद अहम है।
शेयर ट्रांसफर और हिस्सेदारी का गणित
इस छूट के मिलने के बाद, प्रमोटर शेयरहोल्डर श्यामा अग्रवाल ने 31 मार्च 2026 को ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन (Off-Market Transaction) के जरिए 47.61 लाख इक्विटी शेयर्स Gallantt Trust को ट्रांसफर कर दिए। इस ट्रांसफर के बाद, श्यामा अग्रवाल की हिस्सेदारी 2.14% (जो 51.61 लाख शेयर्स थी) घटकर अब 0.17% (4 लाख शेयर्स) रह गई है। वहीं, Gallantt Trust के पास अब कंपनी के कुल 24.13 करोड़ शेयर्स में से 14.49 करोड़ इक्विटी शेयर्स आ गए हैं, जो कंपनी की कुल इक्विटी का 60.05% है।
कंपनी का प्रोफाइल
Gallantt Ispat, जिसे मूल रूप से 2005 में 'Gallantt Metal Limited' के नाम से शामिल किया गया था, का नाम जून 2022 में बदला गया। कंपनी स्टील मैन्युफैक्चरिंग के कारोबार में है, जिसमें स्पंज आयरन, MS बिलेट्स और TMT बार जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी पावर जेनरेशन, एग्रो-बिजनेस और रियल एस्टेट में भी सक्रिय है।
क्या हुआ कंट्रोल में?
यह ट्रांजैक्शन शेयरहोल्डिंग को Gallantt Trust के तहत कंसॉलिडेट करता है, जिससे प्रमोटर ग्रुप की संरचना सरल हो जाती है। SEBI की छूट का मतलब है कि बड़ी मात्रा में शेयर हासिल करने पर लगने वाली ओपन ऑफर की सामान्य शर्त Gallantt Trust पर लागू नहीं होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बदलाव से Gallantt Ispat Limited के समग्र नियंत्रण (Overall Control) में कोई बदलाव नहीं आया है, और पब्लिक शेयरहोल्डिंग का प्रतिशत भी अप्रभावित रहेगा।
आगे क्या?
SEBI द्वारा Gallantt Trust को दी गई यह छूट आदेश की तारीख, 20 मार्च 2026, से एक साल के लिए मान्य है। इस अवधि के भीतर अधिग्रहण पूरा होना चाहिए। Gallantt Trust को ट्रस्ट डीड में बताई गई SEBI की कुछ विशेष शर्तों, जैसे डिस्क्लोजर (Disclosures) और कोवेनेंट्स (Covenants) का पालन करना होगा।
पुरानी तस्वीर
दिसंबर 2025 तिमाही के अनुसार, प्रमोटर शेयरहोल्डिंग 69.83% पर थी, जो पिछली तिमाही से बढ़ी हुई थी।
