'लार्ज कॉर्पोरेट' न होने के क्या हैं मायने?
Galaxy Bearings Limited ने BSE को दी जानकारी में कन्फर्म किया है कि वह फाइनेंशियल ईयर 2026 (31 मार्च 2026 को समाप्त) के लिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) की कैटेगरी में नहीं आती है। कंपनी ने बताया कि ₹18 करोड़ का उसका आउटस्टैंडिंग कर्ज, SEBI द्वारा तय की गई बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए निर्धारित सीमा से काफी नीचे है।
क्यों मिली है राहत?
SEBI का 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क बड़ी कंपनियों के लिए डेट मार्केट से फाइनेंसिंग उठाने और कड़े रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स फॉलो करने के लिए बनाया गया है। LC कैटेगरी में न आने के कारण, Galaxy Bearings को इन विशेष नियमों और अनुपालन (Compliance) के बोझ से छूट मिल गई है। इससे कंपनी का मैनेजमेंट कंप्लायंस की जटिलताओं में फंसे बिना, अपने मुख्य कामों पर ध्यान दे सकेगा।
SEBI का क्या है नियम?
SEBI ने नवंबर 2018 में यह 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क शुरू किया था, जिसमें पहले ₹100 करोड़ से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म बोरिंग और 'AA' क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों को शामिल किया जाता था। बाद में, अक्टूबर 2023 से इस सीमा को बढ़ाकर ₹1000 करोड़ या उससे अधिक कर दिया गया। इस फ्रेमवर्क के तहत, योग्य कंपनियों को अपनी नई बोरिंग का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज के जरिए उठाना पड़ता है।
इंडस्ट्री में कौन है?
Galaxy Bearings की तरह, हाल ही में Signature Green Corporation Ltd. ने भी खुद को नॉन-लार्ज कॉर्पोरेट घोषित किया था, क्योंकि उनका कर्ज भी ₹1000 करोड़ की सीमा से कम था। Galaxy Bearings बॉल और टैपर रोलर बेयरिंग बनाने के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करती है।