इस नियुक्ति को 73.96% शेयरधारकों का समर्थन मिला है। कुल 1,00,40,960 वोट पोस्टल बैलट में डाले गए, जो कंपनी के आउटस्टैंडिंग शेयर्स का एक बड़ा हिस्सा दर्शाता है।
ऑडिटर नियुक्ति का महत्व
किसी भी कंपनी के लिए एक स्टैट्यूटरी ऑडिटर की नियुक्ति कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) का एक बेहद अहम हिस्सा है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि गैबियन टेक्नोलॉजीज का वित्तीय ऑडिट (Financial Audit) निर्बाध रूप से जारी रहे, जिससे रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) और पारदर्शिता बनी रहे। पिछले ऑडिटर के इस्तीफे से खाली हुई जगह को भरने और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण है, जो SEBI के नियमों के पालन के लिए भी ज़रूरी है।
ऑडिटर के इस्तीफे की पृष्ठभूमि
यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब गैबियन टेक्नोलॉजीज इंडिया लिमिटेड के पिछले स्टैट्यूटरी ऑडिटर, एम/एस एसवीजे एंड कंपनी (M/s SVJ & Company) ने 30 जनवरी, 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे का कारण रेमुनरेशन (Remuneration) यानी फीस को लेकर हुए मतभेद थे। इसके बाद, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 19 मार्च, 2026 को एम/एस. विपिन अग्रवाल कुडसिया एंड एसोसिएट्स (M/s. Vipin Aggarwal Kudsia & Associates) को इस कैजुअल वैकेंसी (Casual Vacancy) को भरने के लिए नियुक्त किया था, जो 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के लिए थी। हालिया पोस्टल बैलट से इसी बोर्ड नियुक्ति को शेयरधारकों से औपचारिक मंजूरी ली गई।
आगे क्या?
शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद, एम/एस. विपिन अग्रवाल कुडसिया एंड एसोसिएट्स अब 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के लिए कंपनी के स्टैट्यूटरी ऑडिटर के रूप में अपना काम जारी रखेंगे। यह कदम ऑडिट प्रक्रिया में निरंतरता सुनिश्चित करता है और ऑडिटर नियुक्ति के लिए नियामक आवश्यकताओं को पूरा करता है।
निवेशकों की चिंताएं
हालांकि, पिछले ऑडिटर के रेमुनरेशन पर हुए विवाद ने निवेशकों का ध्यान गैबियन टेक्नोलॉजीज की कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रैक्टिस पर खींचा है। ऐसे में, निवेशक अब नए ऑडिटर के प्रदर्शन और भविष्य में ऑडिटर फीस को लेकर होने वाली किसी भी चर्चा पर बारीकी से नज़र रखेंगे।
