बोर्ड की मंजूरी, पावर सेक्टर में एंट्री
GTV Engineering के डायरेक्टर्स ने एक अहम फैसले में Chirchind Hydro Power Private Limited (CHPPL) में 35.31% हिस्सेदारी के एक्विजिशन (acquisition) को मंजूरी दे दी है। इस डील का वैल्यू ₹23.52 करोड़ आंका गया है, और इसके पूरा होने पर CHPPL कंपनी की सब्सिडियरी बन जाएगी। डायरेक्टर्स ने भविष्य में लोन (loans), गारंटी (guarantees) या इन्वेस्टमेंट (investments) के लिए ₹100 करोड़ तक की फंड रेज करने की भी मंजूरी दे दी है। हालांकि, इन दोनों प्रस्तावों को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी 16 अप्रैल 2026 को होने वाली एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में और रेगुलेटरी अथॉरिटीज से क्लीयरेंस मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया जा सकेगा।
रिन्यूएबल एनर्जी की ओर स्ट्रैटेजिक मूव
यह एक्विजिशन GTV Engineering के लिए एक बड़ा स्ट्रैटेजिक कदम है, जो कंपनी को उसके मुख्य हेवी स्टील फैब्रिकेशन बिजनेस से आगे ले जाकर पावर जेनरेशन, खासकर स्मॉल हाइड्रोलिक पावर सेगमेंट जैसे रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) के क्षेत्र में एंट्री दिलाएगा। यह मूव कंपनी के लिए नए ग्रोथ के रास्ते खोलेगा और रेवेन्यू स्ट्रीम्स (revenue streams) को बढ़ाएगा, जो इंडस्ट्री के सस्टेनेबल एनर्जी (sustainable energy) की ओर बढ़ते रुझान के अनुरूप है।
CHPPL का प्रदर्शन और डील की वैल्यू
Chirchind Hydro Power Private Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में ₹35.33 करोड़ का टर्नओवर (turnover) दर्ज किया था। इस कंपनी में GTV Engineering द्वारा एक्वायर की जा रही 35.31% हिस्सेदारी की वैल्यू ₹23.52 करोड़ है। बोर्ड द्वारा स्वीकृत ₹100 करोड़ की फंडिंग लाइन GTV को भविष्य में इस सेक्टर में और विस्तार करने की क्षमता प्रदान करेगी।
आगे की राह और संभावित रुकावटें
इस पूरे सौदे को सफल बनाने के लिए GTV Engineering को कई अहम रुकावटों को पार करना होगा। सबसे पहले, 16 अप्रैल 2026 को होने वाली EGM में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलना जरूरी है। इसके बिना एक्विजिशन और फंडिंग दोनों ही अटक सकते हैं। साथ ही, सभी जरूरी रेगुलेटरी और स्टैच्यूटरी क्लीयरेंस (statutory clearances) हासिल करना भी बेहद अहम होगा।
इंडस्ट्री ट्रेंड्स और कंपीटीशन
GTV Engineering का यह कदम इंडस्ट्री के व्यापक रुझानों के अनुरूप है, जहां Triveni Turbine और Praj Industries जैसी कंपनियां भी रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबल सॉल्यूशंस की ओर बढ़ी हैं। NHPC और Tata Power जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से ही हाइड्रोलिक पावर सेक्टर में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, जो इस सेक्टर की ग्रोथ पोटेंशियल (growth potential) को दर्शाता है।