कंपनी के नतीजे और डिविडेंड का ऐलान
GE Power India Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए मजबूत फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने पूरे साल के लिए ₹252.61 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट घोषित किया है, जो कि 23.75% की शानदार ग्रोथ के साथ ₹1,384.03 करोड़ की कुल आय से संभव हुआ है। वहीं, FY26 की चौथी तिमाही में ₹113.21 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ, जबकि कुल आय ₹335.87 करोड़ रही।
कंपनी के बोर्ड ने अपने प्रदर्शन पर भरोसा जताते हुए FY26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर ₹7 का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है।
निवेशक जिन बातों पर ध्यान दें
हालांकि, नतीजों में कुछ पेचीदगियां भी हैं। GE Power India ने नए लेबर कोड के संभावित प्रभावों के लिए ₹425.7 मिलियन का प्रोविज़न (Provision) बनाया है। इसके अलावा, FY23 में इसके दुर्गापुर प्लांट (Durgapur facility) और गैस व हाइड्रो बिजनेस सेगमेंट (Gas and Hydro business segments) के डी-मर्जर (demerger) के बाद बंद हुए ऑपरेशंस (discontinued operations) का असर कंपनी के मौजूदा प्रदर्शन को समझने में थोड़ी मुश्किल पैदा कर रहा है।
कंपनी ने यह भी बताया कि स्टैंडअलोन एनुअल खर्चे 'मटेरियल और इरेक्शन सर्विसेज की लागत' में पिछले साल के ₹7,048.3 मिलियन की तुलना में FY26 में ₹7,765.2 मिलियन की बढ़ोतरी हुई है। ये सभी कारक कंपनी की वित्तीय स्थिति का एक अधिक सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
सेक्टर की अन्य कंपनियों से तुलना
GE Power India की 23.75% रेवेन्यू ग्रोथ FY26 के लिए उल्लेखनीय है। इसकी तुलना में, सेक्टर की अन्य प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL) का रेवेन्यू FY25 में साल-दर-साल घटा, जो ₹26,514 करोड़ रहा। Siemens India ने FY24 में ₹19,427 करोड़ के रेवेन्यू के साथ ग्रोथ दर्ज की, जबकि Larsen & Toubro (L&T) ने FY25 में ₹233,167 करोड़ के रेवेन्यू के साथ मजबूत ग्रोथ दिखाई।
आगे क्या देखना है
आने वाले समय में, निवेशक नए लेबर कोड प्रोविज़न से संबंधित वित्तीय प्रभावों और रणनीतियों पर मैनेजमेंट की टिप्पणी सुनने के लिए उत्सुक रहेंगे। कंपनी के जारी रहने वाले मुख्य ऑपरेशंस की प्रदर्शन और लाभप्रदता की स्पष्टता महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसके अलावा, बंद हुए व्यावसायिक सेगमेंट के दीर्घकालिक प्रभाव और रणनीतिक समाधान को समझना महत्वपूर्ण होगा। निवेशक भविष्य के ऑर्डर पाइपलाइन, एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटी और कंपनी की डिविडेंड पॉलिसी पर भी नजर रखेंगे।
