भारतीय शेयर बाज़ार में, सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) के नियम 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) माने जाने वाली कंपनियों के लिए फंड जुटाने के तरीके तय करते हैं। ऐसे में, Frontier Springs Ltd. ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है कि वह इन नियमों के दायरे में नहीं आती है, जिससे उसे खास छूट मिली है।
हाल ही में, Frontier Springs Ltd. ने वित्तीय वर्ष 2025 के अंत तक ₹701 करोड़ का नेट सेल्स (net sales) और ₹117 करोड़ का नेट प्रॉफिट (net profit) दर्ज किया है। इसी के साथ कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को आधिकारिक तौर पर यह भी सूचित किया है कि वह SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के मानदंडों को पूरा नहीं करती है।
SEBI ने 26 नवंबर 2018 के एक सर्कुलर के ज़रिए 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी, ताकि भारतीय डेट मार्केट (debt market) को और मजबूत किया जा सके। इसके तहत, किसी कंपनी को 'लार्ज कॉर्पोरेट' माना जाता है यदि फाइनेंशियल ईयर के अंत में उसका आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग (outstanding long-term borrowing) ₹100 करोड़ या उससे अधिक हो और उसकी क्रेडिट रेटिंग 'AA और उससे ऊपर' हो।
Frontier Springs Ltd. के 'लार्ज कॉर्पोरेट' न होने का मतलब है कि कंपनी SEBI के उन नियमों से बची रहेगी जो बड़ी कंपनियों के लिए डेट सिक्योरिटीज (debt securities) के ज़रिए फंड जुटाने को अनिवार्य बनाते हैं। इससे कंप्लायंस (compliance) और रिपोर्टिंग का बोझ भी कम हो जाएगा।
Frontier Springs Ltd. भारतीय रेलवे के लिए कंपोनेंट्स बनाती है और यह इंडस्ट्रियल गुड्स (industrial goods) सेक्टर में आती है। निवेशकों को कंपनी के डेट लेवल (debt levels) और रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) पर नज़र रखनी चाहिए। SEBI के नियमों में कोई भी बदलाव या कंपनी की बॉरोइंग स्थिति में परिवर्तन भविष्य में इसके क्लासिफिकेशन को प्रभावित कर सकता है।
