रेवेन्यू में उछाल, फिर भी घाटे में क्यों?
एल्प्रो इंटरनेशनल लिमिटेड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए ₹91.97 करोड़ (₹9,197.10 लाख) का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025 (FY25) में हुए ₹6,611.12 लाख के नेट प्रॉफिट (Net Profit) से एक बड़ा उलटफेर है। हालांकि, चिंताजनक बात यह है कि कंपनी के ऑपरेशन्स से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 35% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले साल के ₹39,022.82 लाख से बढ़कर ₹528.14 करोड़ (₹52,814.25 लाख) हो गया। कंपनी के ऑडिटर ने इन वित्तीय नतीजों पर अपनी अनमोडिफाइड राय दी है।
कंपनी की कमाई और निवेश का गणित
1962 में स्थापित एल्प्रो इंटरनेशनल लिमिटेड अब एक विविध व्यावसायिक समूह बन गई है। इसके कारोबार में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (जैसे सर्ज अरेस्टर्स) का निर्माण, रियल एस्टेट डेवलपमेंट, निवेश गतिविधियां और विंडमिल ऑपरेशन्स शामिल हैं। कंपनी ने हाल के वर्षों में Mynd Solutions, वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd.) और एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस इंडिया लिमिटेड (Aptus Value Housing Finance India Limited) जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदकर रणनीतिक ग्रोथ पर जोर दिया है।
नतीजों पर असर डालने वाले खास फैक्टर्स
कंपनी के नतीजों पर दो मुख्य फैक्टर का बड़ा असर दिख रहा है। पहला, कुछ अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में किया गया निवेश, जिनका वैल्यूएशन ₹33,945.35 लाख है। इन फंड्स का नेट एसेट वैल्यू (NAV) अभी अपडेट होना बाकी है। फिलहाल, इंटरिम वैल्यूएशन के लिए पिछले तिमाही के NAV का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब अपडेटेड NAV मिलेगा, तो भविष्य के फाइनेंशियल पीरिएड्स में एडजस्टमेंट (Adjustment) किए जाएंगे। दूसरा, कंपनी नए लेबर कोड्स (Labour Codes) पर भी बारीकी से नजर रख रही है। सरकार ने इन कोड्स की सूचना तो जारी कर दी है, लेकिन इनके तहत नियम अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं। नियमों के अंतिम रूप लेने के बाद संभावित बड़े बदलावों की उम्मीद है।
