31 मार्च 2026 को समाप्त हुए पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए Elecon Engineering का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹2,366 करोड़ पर पहुंच गया। यह ग्रोथ कंपनी की मटेरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट (MHE) डिवीजन की मजबूत परफॉरमेंस से प्रेरित थी। हालांकि, चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों में थोड़ी नरमी दिखी, जहां रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 7% घटकर ₹746 करोड़ रहा। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक चुनौतियों और गियर डिवीजन (Gear Division) के शिपमेंट में आई देरी को बताया जा रहा है।
पूरे साल के लिए कंसोलिडेटेड EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) 5% घटकर ₹523 करोड़ रहा। वहीं, चौथी तिमाही में EBITDA में 19% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹158 करोड़ पर सिमट गया। FY26 के लिए EBITDA मार्जिन 22.1% पर था, जबकि Q4 FY26 में यह 21.2% पर आया।
कंपनी के परफॉरमेंस में मटेरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट (MHE) डिवीजन का बड़ा योगदान रहा, जिसके रेवेन्यू में Q4 FY26 में 36.8% की शानदार तेजी आई और यह ₹274 करोड़ पर पहुंच गया। इसके विपरीत, गियर डिवीजन के रेवेन्यू में 21.0% की भारी गिरावट देखी गई, जो Q4 में ₹472 करोड़ रहा।
FY26 के अंत में, Elecon Engineering का ओपन ऑर्डर बुक 36% बढ़कर ₹1,292 करोड़ हो गया है, जो भविष्य के लिए एक मजबूत आधार दिखाता है।
कंपनी अब MHE डिवीजन के विस्तार और इंटरनेशनल बिजनेस को बढ़ाने पर खास फोकस कर रही है। मैनेजमेंट का लक्ष्य 2030 तक एक्सपोर्ट से 50% रेवेन्यू हासिल करना है। इसके अलावा, गियर डिवीजन की क्षमता बढ़ाने के लिए 2026-28 के दौरान ₹400-500 करोड़ का बड़ा कैपेक्स (Capex) प्लान किया गया है।
निवेशकों की नजर MHE बिजनेस की ग्रोथ और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कंपनी की पैठ पर रहेगी। गियर डिवीजन के प्रदर्शन को सुधारने की कोशिशें भी अहम होंगी। हालांकि, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताएं और मध्य पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) अभी भी ऑर्डर और शिपमेंट पर असर डाल सकते हैं, जो मुख्य जोखिम बने हुए हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि FY26 के नतीजों में आर्बिट्रेशन क्लेम सेटलमेंट से ₹25 करोड़ का एक बार का फायदा शामिल था, जो आगे नहीं होगा।
बाजार में Elecon Engineering के सामने Shanthi Gears जैसे प्रतिद्वंद्वी हैं, जो इंडस्ट्रियल गियर सेक्टर में समान प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं। वहीं, MHE और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन स्पेस में ABB India और Siemens India जैसे प्लेयर्स भी मौजूद हैं।
अब देखना होगा कि कंपनी गियर डिवीजन की रिकवरी कैसे करती है और अपने बड़े ऑर्डर बुक को कैसे पूरा करती है। MHE डिवीजन की निरंतर ग्रोथ और एक्सपोर्ट लक्ष्यों को पाना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
