Dhampure Specialty Sugars: बोर्ड की नजर प्रमोटर वॉरंट्स पर
Dhampure Specialty Sugars Ltd ने हाल ही में अपनी तीसरी तिमाही, फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू ₹16.68 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹2.04 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी की मार्केट कैप फिलहाल लगभग ₹105 करोड़ है।
बोर्ड करेगा वॉरंट अलॉटमेंट पर विचार
अब, 11 मई 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग में, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप को वॉरंट अलॉट करने की मंजूरी पर विचार करेंगे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी (in-principal approval) मिल चुकी है, और बोर्ड का फैसला इस प्रक्रिया में एक अहम कदम होगा।
शेयर होल्डिंग और कैपिटल पर क्या होगा असर?
प्रमोटर्स को वॉरंट अलॉट करने का मकसद कंपनी के शेयर होल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव लाना है। इससे कंपनी की पूंजी (capital) को मजबूत करने या प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अगर वॉरंट एक्सरसाइज किए जाते हैं, तो Dhampure Specialty Sugars Ltd के शेयर होल्डिंग पैटर्न में बदलाव आ सकता है। वॉरंट कन्वर्जन पर संभावित इक्विटी इनफ्यूजन से कंपनी की कैपिटल स्ट्रक्चर मजबूत हो सकती है, जिससे प्रमोटर का कंट्रोल और हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
पिछली वॉरंट एक्टिविटी
यह पहली बार नहीं है जब Dhampure Specialty Sugars वॉरंट जारी कर रही है। सितंबर 2025 में, बोर्ड मीटिंग में प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप को वॉरंट कन्वर्जन पर 400,000 इक्विटी शेयर्स अलॉट करने को मंजूरी मिली थी। इससे पहले, 18 मार्च 2026 को हुई एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में शेयरहोल्डर्स ने प्रमोटर ग्रुप को प्रेफरेंशियल बेसिस पर वॉरंट इश्यू करने को भारी बहुमत से मंजूरी दी थी।
ऐतिहासिक जोखिम नोट
एक ऐतिहासिक जोखिम नोट के तौर पर, 2013 में SEBI ने Dhampure Speciality Sugars पर तय समय सीमा के भीतर SCORES ऑथेंटिकेशन प्राप्त करने में विफल रहने पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया था।
इंडस्ट्री का परिदृश्य
Dhampure Specialty Sugars भारतीय शुगर सेक्टर में काम करती है। इसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में Balrampur Chini Mills, Shree Renuka Sugars, Triveni Engineering & Industries, और EID Parry (India) Ltd जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कई कंपनियों ने इथेनॉल और पावर जनरेशन में भी अपने कारोबार का विस्तार किया है।
मुख्य वित्तीय मेट्रिक्स
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अंत तक, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो शून्य है, जिसका मतलब है कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है। मार्च 2026 तक, प्रमोटर की हिस्सेदारी लगभग 60.3% थी।
आगे क्या देखें
निवेशक 11 मई की बोर्ड मीटिंग के नतीजे पर नजर रखेंगे। वे BSE से अंतिम मंजूरी, अलॉटमेंट के बाद शेयर होल्डिंग पैटर्न में किसी भी बदलाव और कंपनी के मार्केट कैप पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव पर भी ध्यान देंगे।
