Q4 के नतीजे: रेवेन्यू में दमदार उछाल, पर सालाना मुनाफे पर दबाव
Delhivery ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए चौथे क्वार्टर और पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 26.30% बढ़कर ₹2,909.42 करोड़ रहा। वहीं, कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹72.40 करोड़ दर्ज किया गया।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 15.95% बढ़कर ₹10,866.96 करोड़ हो गया। हालांकि, कंसोलिडेटेड बेस पर कंपनी का सालाना प्रॉफिट 5.90% घटकर ₹152.54 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹162.11 करोड़ था। यह गिरावट तब आई जब स्टैंडअलोन बेस पर प्रॉफिट 233% से ज्यादा उछला।
इस मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजह हालिया एक्विजिशन (जैसे Spoton, Ecom Express) को इंटीग्रेट करने की लागत और नए लेबर कोड्स से जुड़ा खर्च बताया जा रहा है। कंपनी ने नए लेबर कोड प्रावधानों के तहत ग्रेच्युटी और लीव लायबिलिटी से जुड़ा ₹20.85 करोड़ (₹208.56 मिलियन) का एक विशेष खर्च (Exceptional Expense) भी दर्ज किया है।
एक अच्छी खबर यह है कि कंपनी ने अपने कंसोलिडेटेड करंट बोरिंग्स को काफी कम कर दिया है, जो ₹37.20 करोड़ (₹372.06 मिलियन) से घटकर सिर्फ ₹25.35 लाख (₹25.35 मिलियन) रह गई हैं। इसके अलावा, शेयरधारकों की कुल हिस्सेदारी (Total Equity) में भी बढ़ोतरी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह नतीजे दर्शाते हैं कि Delhivery रेवेन्यू ग्रोथ के मामले में मजबूत स्थिति में है और अपनी मार्केट पकड़ को मजबूत कर रही है। बैलेंस शीट भी मजबूत दिख रही है, क्योंकि शॉर्ट-टर्म कर्ज काफी कम हुआ है। प्रॉफिटेबिलिटी के मोर्चे पर मिले-जुले संकेत हैं: स्टैंडअलोन प्रदर्शन शानदार है, लेकिन एक्सपेंशन और इंटीग्रेशन की लागतों के कारण कंसोलिडेटेड लेवल पर दबाव दिख रहा है।
निवेशकों की नजरें अब इस बात पर रहेंगी कि मैनेजमेंट कैसे Ecom Express और Spoton Logistics जैसे एक्विजिशन से तालमेल बिठाकर कंसोलिडेटेड मुनाफे को स्थायी रूप से बढ़ा पाता है। बड़े एक्विजिशन को इंटीग्रेट करने में जटिलताएं बनी रह सकती हैं, जिससे पिछले वित्तीय आंकड़ों में बदलाव (Restatement) की जरूरत पड़ सकती है। ग्रोथ के साथ-साथ लागत नियंत्रण और मार्जिन को बेहतर बनाना कंपनी के लिए अहम होगा।
बाजार में अन्य लॉजिस्टिक्स कंपनियों जैसे Blue Dart Express और Mahindra Logistics की तुलना में, Delhivery का रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत है, लेकिन उन्हें मार्जिन और इंटीग्रेशन जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।