1:10 स्टॉक स्प्लिट क्यों?
इस स्टॉक स्प्लिट के बाद, हर शेयर का फेस वैल्यू ₹10 से घटकर ₹1 हो जाएगा। कंपनी का मुख्य मकसद शेयरों को ज़्यादा से ज़्यादा निवेशकों के लिए सुलभ बनाना है। कम कीमत वाले शेयर रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors) को आकर्षित करते हैं, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volume) और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
कैपिटल में ₹10 करोड़ की बढ़ोतरी
शेयरों के बंटवारे के अलावा, बोर्ड ने अधिकृत शेयर कैपिटल को ₹55 करोड़ से बढ़ाकर ₹65 करोड़ करने का प्रस्ताव दिया है। यह बढ़ोतरी कंपनी को भविष्य में फंड जुटाने, नए प्रोजेक्ट शुरू करने या विस्तार योजनाओं को सपोर्ट करने के लिए अधिक वित्तीय लचीलापन (Financial Flexibility) देगी। इस कैपिटल का इस्तेमाल फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) FY25–FY26 के लिए ज़रूरी माना जा रहा है।
शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ज़रूरी
दोनों ही प्रस्तावों, यानी स्टॉक स्प्लिट और कैपिटल हाइक, को लागू करने के लिए कंपनी को अपने शेयरधारकों (Shareholders) की मंजूरी की आवश्यकता होगी। यह मंजूरी पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) के ज़रिए ली जाएगी। अगर शेयरहोल्डर वोटिंग में इनका समर्थन नहीं करते हैं, तो ये योजनाएं अमल में नहीं आएंगी।
क्या है भविष्य?
यह कदम भारतीय कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनियों के ट्रेंड के अनुरूप है, जहां पहले भी Ahluwalia Contracts (India) Ltd और Dilip Buildcon Ltd जैसी कंपनियों ने लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाने के लिए ऐसे कदम उठाए हैं। अब निवेशकों की नज़रें पोस्टल बैलेट के नतीजों पर टिकी हैं, जो इन योजनाओं की सफलता तय करेंगे।
